निर्वाचन आयोग की बड़ी कार्रवाई : जानिए यूपी के 6 पूर्व प्रत्याशियों को क्यों घोषित किया अयोग्य
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2022 लड़ने वाले छह पूर्व प्रत्याशियों को निर्वाचन व्यय का लेखा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जमा न करने पर भारत निर्वाचन आयोग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। अब ये अभ्यर्थी अगले तीन वर्ष तक लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद का चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10क के तहत आयोग ने 25 फरवरी से इन अभ्यर्थियों को तीन वर्ष की अवधि के लिए किसी भी सदन का सदस्य चुने जाने अथवा बनने से वंचित कर दिया है।
उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार किसी भी चुनाव में भाग लेने वाले सभी प्रत्याशियों को परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर अपने चुनाव खर्च का पूरा विवरण और संबंधित वाउचर जिला निर्वाचन अधिकारी के पास जमा करना अनिवार्य होता है। यह प्रावधान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 78 में किया गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार संबंधित अभ्यर्थियों को निर्वाचन आयोग की ओर से नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने न तो कोई जवाब दिया और न ही चुनाव व्यय का लेखा प्रस्तुत किया। इस कारण आयोग ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।
आयोग द्वारा अयोग्य घोषित किए गए अभ्यर्थियों में बदायूं जिले के बिसौली (अनुसूचित जाति) विधानसभा क्षेत्र से प्रज्ञा यशोदा और सुरेन्द्र, सहसवान विधानसभा क्षेत्र से अनिल कुमार, शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता देवी तथा दातागंज विधानसभा क्षेत्र से ओमवीर और मुन्ना लाल शामिल हैं।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव खर्च का पारदर्शी लेखा देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निर्धारित समय में व्यय का विवरण न देने पर आयोग सख्त कार्रवाई करता है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।
