राममंदिर पूर्ण होने पर वेद मंत्रों का महा अनुष्ठान, 90 दिनों तक महाराष्ट्र के आचार्यों द्वारा आयोजन
अयोध्या, अमृत विचार। राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का कार्य संपन्न होने के बाद महाराष्ट्र के वैदिक आचार्यों के द्वारा परिसर स्थित यज्ञशाला में वेद मंत्रों की ऋचाओं के परायण के साथ अनुष्ठान किया जा रहा है। 90 दिनों तक चलने वाले इस महायज्ञ में शामिल होने के लिए 24 से अधिक आचार्यों का दल अयोध्या पहुंच गया है।
राम मंदिर निर्माण के विघ्न बाधा को रोकने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संरक्षण में श्री सतगुरु ग्रुप के माध्यम से महाराष्ट्र के वैदिक विद्वान के द्वारा चारों वेदों के मंत्रों का पाठ और हवन पूजन का आयोजन परिसर निकट गणपति भवन किया गया था। यह अनुष्ठान चार महीने तक चला।
जिसमें महाराष्ट्र के प्रत्येक जिले से वैदिक आचार्य यहां पहुंचकर इस अनुष्ठान में शामिल हुए। जिसके बाद महाराष्ट्र के आचार्यों ने अन्य तीर्थ स्थानों पर भी इसी तरह के अनुष्ठान किया है। अब मंदिर निर्माण का कार्य सम्पन्न होने पर दूसरी बार इस प्रकार का आयोजन मंदिर परिसर स्थित यज्ञ शाला में किया जा रहा है।
महाराष्ट्र से आए 24 से अधिक वैदिक विद्वानों ने विधि-विधान पूर्वक वैदिक मंत्रोचार के बीच अनुष्ठान प्रारंभ किया है। धार्मिक मान्यता है कि वेदों के उच्चारण पूजा पद्धति से ग्रह और नक्षत्र अनुकूल बनते हैं। आचार्यों ने बताया कि चारों वेदों का अनुष्ठान यहां किया जा रहा है । जिसमें चंडी पाठ, वरुण सूक्त और रुद्र सूक्त का पाठ किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वेदों के प्रकांड विद्वान अलग-अलग वेदों का परायण संपन्न करेंगे।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के मुताबिक चार वेद दुनिया की प्राचीनतम धरोहर हैं। ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद की 11 शाखाएं हैं। सभी वेद की शाखाओं के विद्वान भारत में मिलते हैं। महाराष्ट्र के वैदिक ब्राह्मणों की एक टोली वेद मंत्रों की ऋचाओं का परायण कर रामलला को वेद मंत्र सुना रहे है।
