World Sleep Day 2026: मोटापा बन रहा नींद का सबसे बड़ा दुश्मन! 80% स्लीप एपनिया मरीज मोटे, तेज खर्राटे और दिनभर थकान हैं बड़े खतरे के संकेत

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार : ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया के करीब 80 प्रतिशत मरीज मोटापे से ग्रस्त होते हैं। मोटे लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक रहता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मामलों में इसका समय पर निदान नहीं हो पाता। यह जानकारी लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने विश्व स्लीप डे पर पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की ओर से आयोजित ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया एवं पॉलिसोमनोग्राफी विषयक कार्यशाला में दी।

नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज यूपी चैप्टर, इंडियन चेस्ट सोसाइटी यूपी चैप्टर व स्नोरिंग एंड स्लीप रिलेटेड ब्रीदिंग डिसऑर्डर्स सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पद्मश्री डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि बीते दो दशक में ये बीमारी काफी तेजी से बढ़ी है, जबकि आम लोग अभी भी इस बीमारी से काफी हद तक अनजान हैं।

डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि जोर से खर्राटे आना, दिन में अत्यधिक नींद आना और नींद के दौरान सांस रुकना स्लीप एपनिया के महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हैं। वहीं डॉ. सारिका गुप्ता ने कहा कि बच्चों में खर्राटों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि उनमें भी स्लीप एपनिया हो सकता है और समय पर निदान बेहद जरूरी है।

पल्मोनरी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार वर्मा ने कहा कि आज के समय में अच्छी नींद को हृदय स्वास्थ्य और समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जा रहा है। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने स्लीप एपनिया के उपचार में पैप थेरेपी, दवाओं, डेंटल उपकरणों और चयनित शल्य चिकित्सा की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की।

इस अवसर पर डॉ. विभा गंगवार, डॉ. अनिल कुमार सिंह, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. आशीष झा, डॉ. देवेंद्र चोपड़ा, डॉ. केबी गुप्ता और डॉ. वेद प्रकाश सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।

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