अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : शिक्षिका संगीता सिंह ने बदला क्लास का माहौल, दीवार पर AI से किया ये काम
संजय शर्मा, बरेली। बरेली के फतेहगंज पश्चिमी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका संगीता सिंह ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) की ताकत को पहचाना ही नहीं उसका शिक्षा में नवाचार के रूप में इस्तेमाल भी शुरू कर दिया। संगीता ने एआई की मदद से थ्री डी तस्वीरें बनाईं। अब बच्चे थ्री डी तकनीक से तैयार किए चीता, ऊंट और बिल्ली जैसे जानवरों के साथ खेलते हुए पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल का माहौल देखकर लगता है कि मानो वन्य जीव सच में बच्चों के बीच आ गए हों।
उच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहगंज पश्चिमी में तैनात शिक्षिका संगीता सिंह ने एआई की मदद से पढ़ाने का ऐसा तरीका खोजा की कक्षा का माहौल पूरी तरह बदल दिया है। वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से कक्षाओं की दीवारों पर थ्री-डी दृश्य तैयार करती हैं। कभी दीवारों पर सूरज उगता दिखाई देता है तो कभी चांद और तारे चमकते नजर आते हैं। वहीं कभी चीता, ऊंट या बिल्ली जैसे जानवर बच्चों के बीच मौजूद नजर आते हैं। इन रोचक दृश्यों के बीच बच्चे पढ़ाई का आनंद लेते हुए नई चीजें सीख रहे हैं।
संगीता सिंह लंबे समय से शिक्षण कार्य में तकनीक का प्रयोग कर रही हैं। वह जूम-एप के माध्यम से पढ़ाने, क्यूआर कोड के जरिये शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराने और सूचना एवं संचार तकनीक (आईसीटी) के प्रयोग में भी आगे हैं। उनके इन प्रयासों से न केवल स्कूल का माहौल बदला है, बल्कि बच्चे भी नई तकनीकों के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
एआई के प्रयोग से नए लेसन भी होते हैं तैयार
संगीता सिंह बच्चों की पढ़ाई में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रही हैं। एआई की मदद से वह बच्चों के लिए नए लेसन प्लान तैयार करती हैं और पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए नए-नए तरीके खोजती रहती हैं। उनके पढ़ाई के इस तरीके से बच्चों की पाठ्य सामग्री को याद रखने का तरीका और तेज हो रहा है।
शिक्षिका संगीता सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में बच्चों को कक्षा में बनाए रखना शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए पढ़ाई में विविधता लाना जरूरी है। आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है और छोटे-छोटे प्रयोगों के जरिये वह बच्चों को एआई से परिचित करा रही हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों के शैक्षिक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। -
