प्रकृति की सच्ची संरक्षिका और सृजन का जीवंत रूप नारी, अमृत विचार में जुटी नारी शक्ति ने की समाज में अपनी भूमिका पर बात, देखें Video
लखनऊ, अमृत विचार : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमृत विचार कार्यालय में विभिन्न क्षेत्रों में सफलता के झंडे गाड़ने वाली महिलाओं ने समाज में अपने स्थान और भूमिका पर मजबूती से अपनी बात रखी।
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गांव में महिलाओं की स्थिति पर बात की गई तो शहर में बच्चों की पिज्जा, मोमोज और अन्य फास्टफूड की तरफ बढ़ती दिलचस्पी के कारणों पर भी पक्ष रखा गया। महिलाओं ने कहा कि बच्चों के अच्छे भविष्य के लिए उनके बेहतर खानपान पर ध्यान रखना भी माताओं की जिम्मेदारी है। प्रकृति के संरक्षण पर उन्होंने कहा कि आरओ से निकलने वाले वेस्ट वाटर का पेड़ पौधों में इस्तेमाल किये जाने, पर्यावरण को बचाने के लिए उनके द्वारा किये जाने वाले उपायों के साथ-साथ महिलाओं ने बताया कि बच्चों के लिए मां ही पहली शिक्षक होती है। मां ही सिखा सकती है कि नल को खुला मत छोड़ो। ब्रश करो तो उतनी ही देर पानी खोलो जितनी देर जरूरत है क्योंकि पानी बहुत बड़ी नेमत है और इसे हर हाल में बचाकर रखना होगा।
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एक महिला ने कहा कि कई बार महिलाओं के पहनावे पर सवाल उठते हैं। कहा जाता है कि महिला सही तरह से कपड़े पहने तो हालात बेहतर हो सकते हैं। इसके जवाब में महिलाएं ही सवाल उठाने लगती हैं कि छह साल की बच्ची से रेप की घटना हो जाती है तो उसमें पहनावा कहां बीच में आया लेकिन यह सब बातें अपनी जगह, बेहतर होगा कि अगर किसी महिला का पहनावा सही न हो तो दूसरी महिला ही उसे टोक दे।
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महिला शिक्षा पर भी बात हुई। वकालत पेशे से एक महिला ने बताया कि वक्फ संपत्तियों को महिलाओं की मदद के लिए छोड़ा गया है, लेकिन बेहतर प्रबन्धन और जानकारी के अभाव में महिलाओं को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस जैसे मौके इसलिए आते हैं कि महिलाएं अपना ज्ञान इतना बढायें कि वह यह जान सकें कि उनके अधिकार क्षेत्र में क्या-क्या है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अमृत विचार की पहल को सराहा और अपने विचार को पुरजोर ढंग से उठाया।
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समाज में जो महिलाएं पढ़ी- लिखी हैं उनका दायित्व बनता है कि वह अपने आसपास की महिलाओं को जागरुक करें। जो महिलाएं घरों में कार्य करती हैं या छोटे व्यवसाय से जुड़ी हैं उनको सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ कैसे मिल सकता है इसे लेकर बताएं। उनका मार्गदर्शन करें तो बहुत बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। -डॉ. भारती पाण्डेय, अर्थशास्त्र विभाग, श्रीजयनारायण पीजी कॉलेज
नारी शक्ति अपने घर-परिवार और आस पड़ोस में अच्छी आदतें विकसित करने का प्रयास करे तो बहुत बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। पर्यावरण, स्वच्छता, बचत और स्वस्थ जीवन शैली अपनाने का आग्रह हम अपने घर से शुरु करें तो उसका प्रभाव दूसरे लोगों पर भी पड़ेगा। यह छोटे-छोटे कदम बहुत परिणामकारी और परिवर्तन ला सकते हैं जिससे देश को विकसित किया जा सकता है। -डॉ. अनामिका चौधरी, अर्थशास्त्र विभाग, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय
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महिलाएं आज जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। रुढियों और कुप्रथाओं को लांघकर नारी शक्ति अब राष्ट्र के सर्वोच्च पद से लेकर जल, थल, नभ सेनाओं में विज्ञान और नवाचार सहित खेलकूद में आगे बढ़ रही है। बिना नारी शक्ति के सशक्त हुए कोई भी राष्ट्र सशक्त नहीं बन सकता। महिलाएं बच्चों का समाजीकरण कर लैंगिक चेतना जगा बेहतर समाज बना सकती हैं। कानून की जरुरत नहीं पड़ेगी। -डॉ. सुप्रिया सिंह, समाजशास्त्र विभाग, खुनखुन जी गर्ल्स कॉलेज
मैंने खेल की दुनिया में अपना मुकाम बनाने के लिए केडी सिंह बाबू स्टेडियम जिमनास्टिक की प्रैक्टिस शुरू की। मुझे राष्ट्रीय स्तर पर मौका नहीं मिला, इसलिए गोरखपुर के वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में सेलेक्ट होकर 11 वर्ष की आयु में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना करियर का पहला नेशनल खेला और प्रदेश को मेडल दिलाया। -पूजा गुप्ता, स्पोर्ट्स टीचर, राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर यह आवश्यक है कि हम महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण की दिशा में ठोस प्रयास करें। महिलाओं की प्रगति केवल सामाजिक सम्मान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें आर्थिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों में समान अवसर और भागीदारी मिलनी चाहिए। वित्तीय समावेशन महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है, जबकि राजनीतिक सहभागिता उन्हें निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती है। -डॉ. रुचिता सुजय चौधरी, पत्रकारिता विभाग, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय
महिलाएं अपनी क्षमता को पहचानें, दुनिया का कोई ऐसा काम नहीं जो वे न कर सकें। नई पीढ़ी की महिलाओं को मेरा यही संदेश है कि वे ''वुमेन लिब्रेशन'' शब्द को सकारात्मक अर्थ में लें। भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित स्त्री की कोमलता एवं शालीनता को आत्मसात करते हुए अपना लोहा मनवाएं। मन से उस नकारात्मक सोच को निकालें कि पुरुष हमारी स्वतंत्रता एवं विकास के विरोधी है। स्त्री पुरुष एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। -प्रो. रचना श्रीवास्तव, प्राचार्य एपी सेन मेमोरियल गर्ल्स पीजी कॉलेज
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महिलाएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में सांस्कृतिक विरासत को हस्तांतरित करती हैं। मातृशक्ति की देवी के रूप में शक्ति, विद्या और धन के लिए आह्वान किया जाता रहा। रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्या बाई होलकर जैसी शासिकाओं ने दृढ़ता और कुशलता से अपना राज्य चलाया। महिलाओं को शारीरिक, बौद्धिक रूप से सशक्त करना होगा जिससे एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण हो। -प्रो. मंजुला उपाध्याय, प्राचार्या, नवयुग कन्या महाविद्यालय
महिलाएं स्वभाव से ही प्रकृति प्रेमी होती है और उनका प्रकृति से गहरा नाता होता है। आज आवश्यक्ता है कि महिलाएं प्रकृति के संरक्षण को आगे आएं और पर्यावरण को भी अपनी चिंता का विषय बनाएं। -मधु तांबे, सचिव, जेएफ चैरिटेबल ट्रस्ट व पूर्व उपनिदेशक सूचना
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महिलाओं की समाज में महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके लिए अपने स्वास्थ्य पर उन्हें ध्यान देना होगा। महिलाएं स्वस्थ रहकर ही स्वस्थ परिवार और समाज का निर्माण कर सकती है। इसलिए मानसिक और शारीरिक रुप से स्वस्थ रहते हुए दूसरे को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। -डॉ. श्वेता साधवाणी
महिला दिवस पर हम सभी महिलाएं अपने अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान करें और एक दूसरे का समर्थन करें। एक दूसरे को जागरुक करते हुए उन्हें उनके कर्तव्यों और अधिकार के प्रति जागरुक करना भी देश सेवा से कम नहीं है। -प्रो. अमिता कन्नोजिया
महिलाएं शक्ति हैं, महिलाएं प्रेरणा हैं, हमसभी को उनकी सफलता और योगदान का सम्मान करना चाहिए और उन्हें उत्साहित करना चाहिए। अब पहले से काफी बदलाव हुआ है और महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
-रुचि सिंह, व्यापारी नेता
महिला दिवस पर हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि हम एक साथ मिलकर समाज में महिलाओं के प्रति समानता और न्याय की दिशा में काम करें। जिससे हमारा समाज और देश विकसित और तरक्की करने की दिशा में आगे बढे़।
-डॉ. स्नेह लता
महिलाएं अब नौकरी के भरोसे नहीं बैठी हैं, व्यापार और उद्योग क्षेत्र में भी खूब आगे बढ़ रही हैं। जरूरत है कि हम सभी एक दूसरे का सहयोग करें, एक महिला दूसरी महिला को प्रोत्साहित करें और एक दूसरे का हाथ पकड़कर आगे बढ़ाए। आपस में प्रेम, सद्भाव और सहयोग बनाएंगे तो नारी शक्ति मजबूत होगी। - गीता गुप्ता, राष्ट्रीय अध्यक्ष, संयुक्त व्यापार मंडल
-महिला दिवस एक दिन का न होकर प्रत्येक दिन महिलाओं का है। उगते से ढलते सूर्य तक बदलती कार्यो की भूमिका उसके बिना अधूरी है। महिला दिवस का दिन उसकी उपलब्धि, सहनशीलता, कर्मठता, उदारता को मान-सम्मान देने का दिन है। मां, बेटी, बहू, पत्नी के साथ प्रत्येक बेटी को भय मुक्त वातावरण मिले ऐसे संकल्प का वादा पुरुष प्रधान समाज से मिले उसका दिन है। आधी आबादी मे गिने जाने वाली महिलाओं को पुरूष के साथ, प्रेम ,सहयोग, सुरक्षात्मकता का विश्वास मिले। तब महिला दिवस की सार्थकता है। -ज्योति किरन रतन, कलाकार
-नारी सशक्त है। हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है। कविता के माध्यम से तू अखंड है, प्रचंड है, तरंग है, शेर की दहाड़ तू, नदी का उफान है, नारी तू महान है, देश का अभिमान है कविता पाठ किया। -अनु जैन
-नारी शक्ति प्रकृति की सच्ची संरक्षिका और सृजन का जीवंत रूप है। वह स्वार्थ, प्रसिद्धि या अमरता की इच्छा के बिना सृजन करती है और त्याग व समर्पण का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है। प्रसव पीड़ा सहकर भी वह भविष्य को जन्म देती है। इसलिए समाज में उसके त्याग, स्नेह और योगदान के प्रति सम्मान व संवेदना बनाए रखना आवश्यक है। - रोमा हेमवानी, वाटर योगा एक्सपर्ट
-नारी शक्ति से बेहतर कोई नहीं जानता कि संसार रूपी उपवन को सींचने के लिए नदियों सी आर्द्रता भी होनी चाहिए और पेड़ों सी छाया प्रदान करने वाला सौम्य आंचल भी। लेकिन उसके इस बलिदान, समर्पण और निश्चल स्नेह के लिए उसके समाज और संतति के भीतर संवेदना, भाव और सम्मान अवश्य होना चाहिए। -चारू सिंह
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महिला दिवस पर हम सभी महिलाएं अपने अधिकारों और स्वतंत्रता का सम्मान करें और एक दूसरे का समर्थन करें। एक दूसरे को जागरुक करते हुए उन्हें उनके कर्तव्यों और अधिकार के प्रति जागरुक करना भी देश सेवा से कम नहीं है। - प्रो. अमिता कन्नोजिया
महिलाएं शक्ति हैं, महिलाएं प्रेरणा हैं, हमसभी को उनकी सफलता और योगदान का सम्मान करना चाहिए और उन्हें उत्साहित करना चाहिए। अब पहले से काफी बदलाव हुआ है और महिलाएं प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।
-रुचि सिंह, व्यापारी नेता
महिला दिवस पर हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि हम एक साथ मिलकर समाज में महिलाओं के प्रति समानता और न्याय की दिशा में काम करें। जिससे हमारा समाज और देश विकसित और तरक्की करने की दिशा में आगे बढे़।
डॉ. स्नेह लता
आज भी गांवों में महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। वह अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नहीं हैं। एनीमिया की शिकार सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं हैं। उन्हें जागरूक करने के लिए सभी का प्रयास होना चाहिए। मैं एनजीओ के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रही हूं।- डॉ. अर्चना श्रीवास्तव
महिलाओं का पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान है। वह बच्चों को सिखा सकती है। गीला कचरा सूखा कचरा के निस्तारण के बारे में बता सकती है। बच्चों को पानी बचाने के प्रति जागरूक करें। ब्रश करते समय बच्चों को सिखाएं कि नल खुला न रखें। मेरा मानना है कि जब हम बच्चों को छोटी-छोटी बातें सिखाएंगे तो वही आगे चलकर समाज को दिशा देंगे।
-ओम सिंह
मैं अपनी संस्था की मदद से मोटे अनाज को लेकर लोगों को जागरूक करती हूं। मोटे अनाज के खाद्य पदार्थ तैयार करती हूं। लोगों के इसके खाने के फायदे बताती हूं। जर्मनी में भी हमारे खाद्य पदार्थों को पसंद किया जा रहा है। जो सेहत के लिए बेहतर हैं।
- मनी टंडन, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल
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समाज में आज भी महिलाओं का एक बड़ा तबका है जो मतदान में हिस्सा नहीं लेता है। आर्थिक प्रबंधन के निर्णय में उनका हस्तक्षेप नहीं चलता है। ये अधिकार उनके घर में सिर्फ पुरुषों को हैं। हम ऐसी महिलाओं को जागरूक कर उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताते हैं।
-प्राची पांडेय, राष्ट्रीय महासचिव संयुक्त व्यापार मंडल
अभी भी महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी कम है। हम सभी की तरफ से कोशिश हो कि ऐसी महिलाओं को जागरूक करें। सरकार की ओर से संचालित योजनाओं के बारे में बताएं। एक मजबूत समाज के लिए महिलाओं को सशक्त होना जरूरी है।
-ज्योति तिवारी, व्यापारी नेता
एक अभियान के तहत देखा गया कि गोलागंज में एक मुस्लिम बस्ती है। जहां की महिलाएं हुनरमंद तो हैं लेकिन उनके घर में सिर्फ उनके पति कि चलती है, इसलिए वह पीछे हैं। उनका कहना है कि पति इजाजत देंगे तभी काम करेंगी। मैं ऐसी महिलाओं को अपने संस्था के माध्यम से जागरूक कर रही हूं।
-खुशबू केसरवानी, व्यापारी नेता
प्रकृति संरक्षण महिलाओं से ही शुरू होता है। पानी संरक्षण करने के प्रति जागरूक करें। शुद्ध भोजन करें। फसलों में खाद या केमिकल न डाला जाएं। मेरा मानना है कि इसमें महिलाओं का विशेष योगदान हो सकता है। बस सतर्क रहें और समय पर ठोस निर्णय लें।
-ऋतुजा सिंह, बघेल
मेरा मानना है कि यदि कोई महिला अपने अधिकारों के प्रति जागरूक है तो उसका कर्तव्य बनता है कि वह अन्य महिलाओं को जागरूक करें। तभी हम समाज में अपनी पहचान बना पाएंगे। इसके लिए क्षेत्र चुन सकते हैं।
-सुनीता चटर्जी, संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल
घर से बाहर कदम निकालते ही दोहरी जिम्मेदारी शुरू हो जाती है। घर और बाहर के काम का दबाव भी रहता है। सामंजस्य बनाकर चलना होता है। महिलाएं ठान लें तो कुछ भी नामुमकिन नहीं है। महिला आपने आप में बहुत सशक्त है।
-डॉ. श्वेता सिंह, उपाध्यक्ष भाजपा अवध प्रांत
मेरा मानना है कि जो गुण जिस भी महिला में है वह उसे कम से कम दस लड़कियों को जरूर सिखाएं। कला का दान करें। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए पुरुषों से ज्यादा महिलाओं का योगदान सकारात्मक बदलाव ला सकता है। मैं लड़कियों को मुफ्त में डांस और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण देती हूं।
-प्रियंका वर्मा, व्यापारी नेता
आज महिलाएं किसी से कम नहीं हैं। हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन कर रही हैं। ऐसी महिलाओं से प्रेरणा लेने की जरूरत है। मैं समाज सेवा के साथ सिविल सर्विसेज की तैयारी भी कर रही हूं। महिलाएं लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढे़।
-प्रियम राज, छात्रा
महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं को समान अधिकार, अवसर और सम्मान देना। जब महिलाएं शिक्षित, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनती हैं, तो परिवार, समाज और देश की प्रगति तेज होती है। हमें उन्हें निर्णय लेने और अपने सपने पूरे करने का अधिकार देना चाहिए।
-दीक्षा वर्मा, छात्रा
मेरा मानना है कि महिलाएं हमेशा से सशक्त थीं। उसे अपनी शक्ति का अहसास नहीं था। अब महिला अग्रणी भूमिका में हैं। समाज भी अब महिलाओं को अवसर प्रदान कर रहा है। महिलाओं को अपनी जिम्मेदारियों के साथ, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना होगा।
-निमिषा सोनकर
महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार के खिलाफ महिलाओं को ही आगे आना होगा। तभी हम सच्चे मायने में महिला दिवस को सार्थक कर पायेंगे। नारी केवल परिवार ही नहीं, प्रकृति की भी संरक्षक है। जिस तरह वह जीवन को जन्म देती है, उसी तरह पर्यावरण को भी सहेजने की शक्ति रखती है।
-डॉ. अर्पणा सिंह, डॉ. राममनोहर लोहिया लॉ यूनिवर्सिटी
महिला शिक्षित होती है, तो समाज और घर दोनों शिक्षित होता है। इससे ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण होता है। रही बात प्रकृति के सरंक्षण की तो आज घर से ही महिलाएं पानी बचाकर, पेड़ लगाकर और बच्चों को पर्यावरण का महत्व सिखा अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं।
-नुसरत जहां, अधिवक्ता
-महिलाएं अर्थव्यवस्था और समाज की उन्नति की असली शक्ति हैं। इसके साथ ही नारी शक्ति बदलाव की प्रेरणा भी हैं। अगर महिलाएं आगे आएं तो प्रकृति संरक्षण के आंदोलन को और मजबूती मिल सकती है।
-सीमा सिंह, अध्यक्ष अखिल भारतीय क्षत्रिय कल्याण परिषद
- महिला सशक्त है तो वह परिवार को भी सशक्त बनाएगी। इसलिए हर महिला को बच्चों की एजूकेशन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। महिलाएं स्वभावत: संवेदनशील होती हैं, इसलिए वे प्रकृति के दर्द को समझ कर जागरूकता के बल पर उसे समृद्ध कर सकती हैं।
-मानसी चक्रवती, संयुक्त व्यापार मंडल
-लोकतंत्र में महिलाओं को न केवल बराबरी का दर्जा मिले, बल्कि शासन प्रणाली में उनकी समान जिम्मेदारी भी हो। धरती से जुड़े हैं, इसलिए उसे सुरक्षित रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। नारी और प्रकृति दोनों ही जीवन की आधारशिला हैं।
उजमा सिद्दीकी
-अध्यक्ष संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल
