केरल का इंतजार खत्म! सैमसन बने नए खेल आइकन, राज्य में जश्न की लहर
बेंगलुरू: एक छोटी सी कहानी है जो सैमसन विश्वनाथ के अपने बेटे संजू पर गहरे असर के बारे में बहुत कुछ बताती है। केरल का यह क्रिकेटर राजस्थान रॉयल्स के लिए अपने पहले आईपीएल सत्र के बाद एक स्टार की तरह अपने गृहनगर विझिंजम लौटा था। कभी संजू के साथ सड़कों पर खेलने वाले गांव के युवा क्रिकेटर अब उसके पास जाने से हिचकिचा रहे थे। उनकी हिचकिचाहट को भांपते हुए दिल्ली पुलिस के पूर्व अधिकारी विश्वनाथ ने संजू को कुछ समय के लिए अपने पुराने दोस्तों के साथ खेलने के लिए कहा।
उस समय संजू को अपने पिता से सलाह मिली, ''अपनी जड़ों से कभी दूर मत जाना।'' ये शब्द संजू के साथ तब भी रहे जब उन्होंने खेल के उतार-चढ़ाव का सामना किया। हाल में संपन्न टी20 विश्व कप में सैमसन 321 रन बनाकर टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बने।
सैमसन के शुरुआती कोच बीजू जॉर्ज ने बताया, '' मुझे लगता है कि उसके शुरुआती मुकाबलों की तुलना में मुख्य अंतर यह है कि उसके पैरों में स्थिरता लौट आई है, एक मजबूत आधार हमेशा से उसकी ताकत रही है। जब वह क्रीज में पीछे की ओर जाने लगा तो इससे उसका संतुलन बिगड़ गया।''
उन्होंने कहा, ''लेकिन अब ऐसा लगता है कि उसने वह स्थिर आधार वापस पा लिया है और यह उसकी बल्लेबाजी में दिखता है।'' मुंबई में सेमीफाइनल में इंग्लैंड के जोफ़्रा आर्चर के खिलाफ बेसिक्स पर लौटने से मिली मदद साफ नजर आ रही थी। यह जानते हुए कि सैमसन अपने शरीर की तरफ आने वाली गेंदों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं आर्चर ने शॉर्ट गेंद फेंकी लेकिन दाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने घूमकर उसे स्क्वायर लेग के पीछे छक्के के लिए पुल कर दिया। अपने अगले ओवर में आर्चर ने फिर से एक शॉर्ट पिच गेंद के खिलाफ संजू की काबिलियत को परखने की कोशिश की और इस बार इस सलामी बल्लेबाज ने गेंद को वानखेड़े स्टेडियम में मिडविकेट के पीछे दूसरे टीयर के स्टैंड पर भेजा दिया। इन दो शॉट में संजू ने आर्चर और बाउंसर के खिलाफ अपनी कमजोरी से सफलतापूर्वक निपटा। वेस्टइंडीज के खिलाफ आखिरी सुपर आठ मुकाबले से पहले तक संजू का करियर खतरे में था। हालांकि उन्होंने आखिरी तीन महत्वपूर्ण मुकाबलों में नाबाद 97, 89 और 89 रन की पारियां खेलकर भारत को अपना तीसरा टी20 विश्व कप जिताने में मदद की। इसके साथ ही भारत लगातार दूसरा और कुल तीसरा टी20 विश्व खिताब जीतने वाली पहली टीम बना। मुख्य कोच गौतम गंभीर भी सैमसन की कोशिश से बहुत खुश थे और उन्होंने उन्हें एक विशेष प्रतिभा कहा। शानदार लय वापस पाने से पहले सैमसन का खराब प्रदर्शन उनके पिता के लिए चिंता का विषय था जो उनके पहले क्रिकेट कोच थे।
विश्वनाथ ने कहा, ''मैंने उसे (जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच के बाद) एक मैसेज भेजा। अपने देश के लिए अच्छा करो, तुम पहले से ही 31 साल के हो और जो भी मौके तुम्हें मिलें उन्हें जाने मत दो।'' उन्होंने कहा, ''मुझे पता है कि उसमें सभी तरह का कौशल है क्योंकि वह 13 साल की उम्र से गंभीर क्रिकेट खेल रहा है और यह सब उसकी सोच को सही करने के बारे में था। बल्लेबाजी क्रम या ऐसी किसी भी चीज की चिंता मत करो बस खुले दिमाग से खेलो।'' ऐसा लगता कि सैमसन ने इस सलाह को दिल से मान लिया और लगातार तीन अर्धशतक लगाए।
विश्वनाथ ने भावनात्मक होते हुए कहा, ''मैं अपने पोडियन (बेटे) को जानता हूं। मैं उसे छोटी उम्र से देख रहा हूं। मुझे पता था, हम सब जानते थे कि वह वापसी करेगा।'' उन्होंने कहा, ''अब पूरा देश मेरे पिल्ला (बेटे) की प्रतिभा को जानता है और यह वह पल था जिसका मैं और मेरे परिवार में बाकी सभी लोग इंतजार कर रहे थे। मुझे उम्मीद है कि मैं उसे जल्द ही घर पर गले में पदक पहने देखूंगा।''
सैमसन का परिवार की नहीं बल्कि पूरा केरल उनके तिरुवनंतपुरम आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। राज्य ने हमेशा से कुछ शानदार खिलाड़ी दिए हैं जिसमें पीटी उषा, शाइनी विल्सन, पी आर श्रीजेश, अंजू बॉबी जॉर्ज, आईएम विजयन और जिमी जॉर्ज जैसे कुछ नाम शामिल है। लेकिन इस दक्षिणी राज्य के पास दिखाने के लिए कभी कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर नहीं था। एस श्रीसंत और टीनू योहानन ने कुछ समय के लिए चमक बिखेरी लेकिन अलग-अलग वजहों से वे करियर को लंबा नहीं खींच पाए। विश्व कप में सैमसन के प्रदर्शन ने राज्य को एक क्रिकेट आइकन दिया है। राइट अट्रैक्टिव हैडिंग
