जिंदगी का सफर: बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार
श्रीदेवी ने अपनी अदाओं और अभिनय की वजह से लोगों के दिलों में जगह बनाई। अभिनेत्री श्रीदेवी के काम की खासियत कड़ी मेहनत और हर चुनौती को पार करने की लगन थी। उन्होंने कई भाषाओं में काम किया। श्रीदेवी को शुरुआत में हिंदी बिल्कुल नहीं आती थी। उन्होंने अपने करियर में हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में काम करके यह साबित किया कि अगर इच्छा शक्ति और मेहनत हो, तो कोई भी भाषा या बाधा आपके रास्ते में नहीं आ सकती। वह साउथ के बाद बॉलीवुड की पहली फीमेल सुपरस्टार कहलाई।
श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को तमिलनाडु के एक छोटे से गांव मीनमपट्टी में हुआ। उनके पिता का नाम अय्यपन और मां का नाम राजेश्वरी था। उनके पिता एक वकील थे। श्रीदेवी ने छह साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू किया। उनका फिल्मी करियर दक्षिण भारतीय सिनेमा से शुरू हुआ। उन्होंने तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्मों में काम किया और कई पुरस्कार भी जीते। उन्हें 1971 में मलयालम फिल्म 'मूवी पूमबत्ता' के लिए केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। यही समय था, जब उन्होंने यह सीखा कि अभिनय केवल भाषा पर निर्भर नहीं करता, बल्कि भाव और मेहनत सबसे जरूरी हैं।
श्रीदेवी की बॉलीवुड में एंट्री 1979 में हुई। उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘सोलहवां सावन’ थी। हालांकि, उन्हें असली पहचान फिल्म ‘हिम्मतवाला’ से मिली। इस फिल्म में उनके अभिनय और डांस की अद्भुत कला ने दर्शकों को अपना दीवाना बना दिया। उन्हें शुरुआत में हिंदी बोलने में कठिनाई होती थी। उन्होंने यह चुनौती पूरी लगन और अभ्यास से पार कर ली। उनके इस संघर्ष ने कई नए कलाकारों के लिए प्रेरणा का काम किया होगा।
श्रीदेवी ने अपने करियर में कई यादगार रोल निभाए। उन्होंने ‘चालबाज’ में डबल रोल किया, ‘सदमा’ और ‘चांदनी’ जैसी फिल्मों में उनकी एक्टिंग की तारीफ पूरे देश ने की। श्रीदेवी को कई पुरस्कार भी मिले। उन्हें ‘चालबाज’ और 'लम्हें' के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला और साल 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
श्रीदेवी ने करियर में लगभग 200 फिल्मों में काम किया, जिनमें हिंदी, तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्में शामिल हैं। वहीं उन्हें बॉलीवुड की पहली सुपरस्टार भी कहा जाता था। श्रीदेवी ने निजी जीवन को प्राथमिकता देने के लिए इंडस्ट्री से दूरी बनाने का कदम ऐसे वक्त पर उठाया, जब वह अपने करियर के शिखर पर थीं। ब्रेक के 15 साल बाद उन्होंने ‘इंग्लिश विंग्लिश’ जैसी फिल्म के साथ वापसी करने का फैसला लिया और वही निर्णय उनके जीवन के सबसे प्रेरक अध्यायों में से एक बन गया। 24 फरवरी 2018 को दुबई में उनका निधन हो गया। वह आज भले हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके जीवन से मिली सीख और उनका संघर्ष हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे।
