Moradabad: करोड़ों खर्च, फिर भी आरआरसी सेंटर बंद तो कहीं खंडहर में तब्दील

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Published By Monis Khan
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मुरादाबाद, अमृत विचार। ग्राम पंचायतों को कूड़ा प्रबंधन से आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बनाने की योजना दम तोड़ रही है। स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत बनाए गए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) कई जगह इस्तेमाल से पहले ही खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। सेंटर घास-फूस में दब गए हैं, तो कहीं उनकी दीवारें गिरने लगी हैं, तो कुछ जगहों पर इन भवनों का ताला आज तक नहीं खुला है।

स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के दूसरे चरण के तहत वर्ष 2020-21 में बने आरआरसी सेंटरों की हकीकत की पड़ताल करने पर पता चला कि पंचायत राज विभाग के जिम्मेदार इस योजना के प्रति कितने गंभीर हैं। तीन गांवों अबावकरपुर, इस्लाम नगर और काफियाबाद में बने एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र (आरआरसी सेंटर) कागजों तक सिमटे रहे।

अबावकरपुर गांव के बाहर बने आरआरसी सेंटर का गेट खुला था। उसके अंदर बने शीशा कांच, लोहा, कागज कपड़ा थर्माकोल के खाने की दीवार टूटी थी। वहीं खाद्य बनाने के बनाए गड्ढों में घास उगी थी। वहीं इस्लामनगर गांव में के बाहर राजू कुमार के मकान के समीप बने आरआरसी सेंटर में ताला लगा था। 

वहीं गड्ढों में गोबर रखा था। राजू ने बताया कि सफाई कर्मचारी अपनी झाड़ू और अन्य उपकरण रखता है, गांव का कूड़ा नहीं आता है। काफियाबाद गांव में आरआरसी सेंटर जंगल में बंद पड़ा था। इन सबके बावजूद पंचायती राज विभाग की ओर से स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के पांचवें चरण में ठोस कचरा प्रबंधन को मजबूत करने के दावे किए जा रहे हैं।

आय का स्रोत तैयार करना था उद्देश्य
योजना का उद्देश्य गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देना और कचरे से आय का स्रोत तैयार करना था, जिससे ग्राम पंचायतें आत्मनिर्भर बन सकें। लेकिन छह वर्ष बीतने के बाद भी जिले में बने 643 आरआरसी सेंटरों में आधे भी सक्रिय नहीं हुए। एक आरआरसी सेंटर के निर्माण पर ढाई से चार लाख रुपये तक खर्च किए गए थे।

 

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