मानव तस्करी पर यूपी पुलिस सख्त: 9 साल में 1010 मामले, डीजीपी बोले- इस क्रूर अपराध कोहर हाल में रोकेंगे

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Published By Muskan Dixit
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लखनऊ, अमृत विचार: डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि तस्करी क्रूरतम संगठित अपराध तो है ही, साथ ही मानव अधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी है। इस अपराध की जड़ें गरीबी, असमानता एवं विस्थापन जैसी परिस्थितियों में निहित हैं। प्रदेश की सीमाएं नेपाल से जुड़ी होने के कारण विशेष चौकसी की जरुरत है। उन्होंने पुलिस अफसरों से कहा कि हर हाल में मानव तस्करी को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

डीजीपी मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में मानव तस्करी की रोकथाम को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि यूपी के सभी 75 जिलों में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाने स्थापित किए जा चुके हैं। वर्ष 2016 से 2025 के मध्य मानव तस्करी से संबंधित 1010 मामले दर्ज हुए, जिनमें से 832 में आरोप-पत्र दाखिल किए जा चुके हैं। साथ ही विदेश में रोजगार के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले अवैध एजेंटों के विरुद्ध 342 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इस अवसर पर उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पांच विवेचकों एवं पांच एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारियों को सम्मानित किया।

कार्यशाला में डीजी रेलवे प्रकाश डी. ने जीआरपी की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि टूंडला रेलवे स्टेशन से चोरी हुए बच्चे को 24 घंटे में बरामद किया गया था। सेवानिवृत्त महानिदेशक एनडीआरएफ पी.एम. नायर, एडीजी महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन, एन. पद्मजा चौहान, डीजी एसएसबी रत्न संजय आदि ने भी संबोधित किया।

 

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