UP: बंपर पैदावार से दाम कम, लागत न मिलने से किसान परेशान

Amrit Vichar Network
Published By Monis Khan
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रामपुर, अमृत विचार। जिले में आलू की बंपर पैदावार हुई है। खुदाई अभी भी जारी है। खुदरा बाजार में 50 रुपये का 10 किलो आलू बिक रहा है। जिससे किसानों को आलू की फसल पर लगाई लागत का भी पैसा नहीं मिल पा रहा। जिले में आलू के लिए चार कोल्ड स्टोर हैं, जिनमें लगभग 4 लाख मीट्रिक टन आलू रखने की क्षमता है। 1625 हेक्टेअर में मार्च माह में 408750 मीट्रिक टन आलू की पैदावार होती है। लेकिन इस साल आलू की बंपर पैदावार ने दाम धड़ाम कर दिए हैं।

होली के बाद आलू कोल्ड स्टोरेज में रखना शुरू हो जाता है लेकिन, इस बार अभी तक करीब 22 हजार मीट्रिक टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। मंडी में आलू का हाल बदहाल है 100 से 150 रुपये प्रति बोरा पुखराज और 200 रुपये प्रति बोरा की दर से चिप्सोना बिक रहा है। किसान परेशान है क्योकि लागत भी नहीं लौट रही है। मौसम अच्छा होने के कारण इस बार आलू की बंपर पैदावार हुई है। डूंगरपुर स्थित मंडी में खूब आलू पहुंच रहा है लेकिन, इस बार खरीदारों का टोटा है। यूं तो नया आलू फरवरी में आना शुरू हो जाता है लेकिन, वह कच्चा होता है और उसे स्टोर नहीं किया जा सकता। मार्च में आने वाला आलू कोल्ड स्टोर में रखा जाता है। टांडा स्थित कोल्ड स्टोर में एक लाख 20 हजार क्विंटल आलू रखने की क्षमता है। 

जबकि, सिविल लाइंस स्थित तीन कोल्ड स्टोरों पर करीब तीन लाख क्विंटल आलू रखा जा सकता है। कोल्ड स्टोर में आलू रखने के बाद आलू बच जाता है उसके रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। फल एवं सब्जी एसोसिएशन के सेक्रेटरी आमिर खां आढ़ती बताते हैं कि नवीन मंडी में इस समय 3 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। कहा कि आलू की बंपर पैदावार होने के कारण आलू की आवक आसपास के जिलों से भी हो रही है। किसान राजेश सैनी कहते हैं कि इस बार आलू की फसल पर लगाई गई लागत भी लौटकर नहीं आ रही है। लेकिन इस वर्ष आलू को कोई रोग भी नहीं लगा है।

बोले किसान
किसान विनोद यादव ने कहा कि आलू की लागत भी नहीं मिल रही है। करीब 13 वर्ष बाद आलू की इतनी बंपर पैदावार हुई है। मंडी में ढाई से तीन रुपये प्रति किलो आलू बिक रहा है। किसान उस्मान पाशा ने बताया कि कई साल बाद आलू की बंपर पैदावार हुई है। झुलसा रोग नहीं लगा है इसलिए उत्पादन अच्छा हुआ है। आवक बढ़ने से दाम कम हो गए हैं। होरी लाल का कहना है कि अच्छी पैदावार होने और मंडी में आलू की अधिक आवक से दाम गिर गए हैं। खुदरा बाजार में 50 रुपये में 10 किलो बिक रहा है। 

महंगाई में आलू ही सस्ता है। संजोर अली ने बताया कि महंगाई में आलू सस्ता होने से गरीबों को बड़ी राहत मिली है। वह आलू की तरह-तरह की सब्जी बनाकर बच्चों को भोजन करा रहे हैं। यह कुदरत का करम है।  दूसरी तरफ जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा के मुताबिक अच्छे मौसम से आलू का बंपर उत्पादन हुआ है। दक्षिण भारत में भी उत्पादन बेहतर है। पूरे देश में अच्छे उत्पादन होने से दाम गिरे हैं। इस वर्ष कोई रोग भी नहीं लगा। 

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