माटीकला को नई पहचान देने की पहल, बोले राकेश सचान- कारीगरों को आधुनिक उपकरण वितरित कर बढ़ावा दें
लखनऊ, अमृत विचार : खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री राकेश सचान ने कहा कि वर्ष 2018 में बोर्ड गठन के बाद माटीकला उद्योग को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिससे हजारों कारीगरों को रोजगार मिला है। उन्होंने कहा ‘लोकल फॉर लोकल’ और ओडीओपी पहल के माध्यम से माटीकला उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिल रही है।
खादी मंत्री सोमवार को उप्र. माटीकला बोर्ड द्वारा गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में राज्य स्तरीय माटीकला कार्यशाला, सेमिनार एवं पुरस्कार वितरण समारोह में प्रतिभागियों एवं अधिकारियों को सम्मानित करने के बाद संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में माटीकला कारीगरों को आधुनिक उपकरण वितरित कर उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। कार्यशाला में 75 जिलों से आए अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन, ऑनलाइन प्रक्रिया और “माटीकला मोबाइल ऐप” के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया।
इसके साथ ही लखनऊ के तीन माटीकला कारीगरों को आधुनिक प्रशिक्षण के उपरांत निःशुल्क विद्युत चाक वितरित किए गए। इस दौरान डॉ. सुरेन्द्र प्रजापति द्वारा लिखित द्विभाषी पुस्तक “हैंड ऑफ अर्थ: भारतीय माटीकला की जीवन्त परंपरा” का विमोचन भी किया गया।
पुरस्कृत हुए
समारोह में राज्य स्तरीय माटीकला पुरस्कार प्रदान किए गए, आजमगढ़ के भगानु प्रजापति को प्रथम, गोरखपुर के अमरनाथ प्रजापति को द्वितीय और वाराणसी के अमित कुमार प्रजापति को तृतीय पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा जिला ग्रामोद्योग अधिकारियों में गाजीपुर की अमिता श्रीवास्तव और बरेली के मनोज कुमार गुप्ता को भी सम्मानित किया गया।
