ईद का जश्न ना मनाने की अपील पर बोले मौलाना फरंगी महली : कहा- ईद का संबंध किसी इंसानी घटना से नहीं

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ। ईरान पर हमले के विरोध में भारत में कुछ स्थानों पर ईद का जश्न ना मनाने और बांह पर काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज पढ़ने की अपीलों के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने इससे असहमति जताते हुए मंगलवार को कहा कि ईद रोजेदारों को अल्लाह का इनाम है और इसका संबंध किसी एक इंसानी घटना से नहीं है। 

मौलाना खालिद रशीद ने ईद-उल-फित्र की तैयारियों के संबंध में ईदगाह लखनऊ में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में ईरान पर हमले के विरोध में ईद का जश्न नहीं मनाने और बांह पर काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज अदा करने की अपीलों का संदर्भ लेते हुए कहा कि ईद का संबंध किसी एक इंसानी घटना से नहीं है। 

उन्होंने अपने बयान के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि दूसरी हिजरी (इस्लामी संवत) में 17 रमजान को गजवा-ए-बद्र (बद्र के मैदान में हुई लड़ाई) हुआ, उसके बाद भी ईद मनाई गई थी। उन्होंने कहा कि इसके अलावा 21 रमजान 40 हिजरी को हजरत अली की शहादत हुई और 11 हिजरी में 12 रबीउल अव्वल को पैगंबर मोहम्मद साहब का निधन हुआ मगर उसके बावजूद उस साल भी मुसलमानों ने ईद मनाई थी। 

मौलाना ने कहा कि मुसलमानों में ईद-उल-फित्र एक इबादत है लिहाजा इसे किसी इंसानी घटना से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। मालूम हो कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के कुछ इलाकों में शिया समुदाय के लोगों ने ईद नहीं मनाने और नए कपड़े नहीं पहनने की अपील की है। 

वहीं, लखनऊ में शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नक़वी ने ईद-उल-फित्र के अवसर पर मुसलमानों से ईद की नमाज काली पट्टी बांधकर अदा करने का आह्वान किया है। इसके अलावा भोपाल में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों से बांह पर काली पट्टी बांधकर ईद की नमाज अदा करने की अपील की गई है। 

मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि 19 मार्च को ईद का चांद देखा जाएगा और अगर उस दिन चांद नजर आ गया तो 20 मार्च को, अन्यथा 21 मार्च को ईद-उल-फित्र मनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसका ऐलान रात साढ़े सात बजे कर दिया जाएगा। 

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