13 साल की बेहद दर्दनाक जद्दोजहद खत्म... हरीश राणा का किया गया अंतिम संस्कार
नई दिल्ली: 13 साल से लगातार जीवन-मृत्यु के बीच झूल रहे हरीश राणा का अंतिम संस्कार आज बुधवार को दक्षिण दिल्ली के ग्रीन पार्क क्षेत्र में किया गया। हरीश राणा का पूरा जीवन संघर्ष की मिसाल रहे हैं। दिल्ली में जन्मे हरीश पढ़ाई के लिए चंडीगढ़ गए थे, जहां 20 अगस्त 2013 को हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरकर वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उसके बाद से शुरू हुई उनकी लंबी पीड़ा की कहानी आज अंतिम मुकाम पर पहुंच गई है।
जानें कब क्या हुआः
- 20 अगस्त 2013: चंडीगढ़ हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर चोटिल
- 2022: माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की
- 8 जुलाई 2024: हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी
- 15 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
- 11 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान की
- 14 मार्च 2026: हरीश को एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया
- 24 मार्च 2026: एम्स में हरीश राणा का निधन
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हर दिल में एक ही सवाल- क्या यही था अंत?
हरीश के निधन की खबर मिलते ही राज एंपायर सोसायटी में सन्नाटा छा गया। आंसू और राहत दोनों की भावना एक साथ उभर रही है। एक तरफ युवा जीवन के चले जाने का गहरा दुख है, तो दूसरी तरफ 13 साल की उस असहनीय पीड़ा से मुक्ति की राहत भी है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।
स्थानीय निवासी दीपांशु मित्तल ने कहा, “यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज की पीड़ा है। अशोक राणा दंपति ने जो कुछ सहा, उसे कोई शब्द बयां नहीं कर सकता।”
सोसायटी के तेजस चतुर्वेदी ने इसे असाधारण त्रासदी बताया। उन्होंने कहा कि किसी पिता का अपने बेटे के लिए इच्छामृत्यु की अनुमति मांगना ही इस पीड़ा की गहराई को दर्शाता है। अशोक राणा का संघर्ष किसी योद्धा से कम नहीं था।
सचिन शर्मा ने इसे पिता के असीम समर्पण की मिसाल बताया। उन्होंने कहा, “अंतिम समय तक उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी। नवरात्र के पावन दिनों में हरीश का जाना पूरे घटनाक्रम को और भी भावुक बना रहा है।”
पूरी सोसायटी इस वक्त परिवार के साथ खड़ी है। हरीश की कहानी न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि समाज के जेहन में लंबे समय तक याद की जाएगी, एक लंबे, दर्द भरे संघर्ष और अंतहीन प्यार की कहानी के रूप में।
