13 साल की बेहद दर्दनाक जद्दोजहद खत्म... हरीश राणा का किया गया अंतिम संस्कार
गाजियाबादः भारत में 'निष्क्रिय इच्छा मृत्यु' की अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति 31 वर्षीय हरीश राणा का बुधवार सुबह दक्षिणी दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया और इसी के साथ 13 साल से जारी उनके चिकित्सकीय संघर्ष का अंत हो गया।
हरीश के एक पड़ोसी ने बताया कि उनकी मां निर्मला देवी ने अपने बेटे को हाथ जोड़कर भावुक विदाई दी जबकि उनके पिता अशोक राणा ने शोक जताने आए लोगों से न रोने का आग्रह करते हुए कहा कि उनका बेटा अब ''एक अच्छी जगह'' पर है और वह एक अच्छा बेटा था।
परिवार के सदस्यों के अलावा, महिलाओं के नेतृत्व वाले आध्यात्मिक संगठन ब्रह्माकुमारीज की प्रतिनिधि भी अंतिम संस्कार में शामिल हुईं और उन्होंने हरीश के लिए प्रार्थना की। राणा परिवार गाजियाबाद की राज एम्पायर सोसाइटी में रहता है। इस सोसाइटी के निवासी भी दाह संस्कार में शामिल होने और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के सदस्य, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कर्मचारी, हरीश के रिश्तेदार और दोस्तों सहित बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद रहे।
हरीश के शव को एम्बुलेंस में श्मशान घाट लाया गया। लोगों ने हरीश को हाथ जोड़कर अंतिम विदाई दी और कुछ लोगों ने शव को चिता पर रखे जाने से पहले उस पर केसरिया मालाएं चढ़ाईं। हरीश के छोटे भाई आशीष राणा ने अपनी बहन भावना के साथ चिता को मुखाग्नि दी। ब्रह्माकुमारीज की 'सिस्टर' लवली ने कहा कि अंतिम संस्कार के दौरान ध्यान संबंधी मंत्रोच्चार किया गया।
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उन्होंने कहा, ''शरीर नश्वर संसार को छोड़ रहा है लेकिन आत्मा अमर है और उसने एक नयी यात्रा शुरू कर दी है।'' 'सिस्टर' लवली ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''परिवार ने हरीश की आंखें दान करने का फैसला किया है।'' परिवार के सदस्यों से बात नहीं हो पाने के कारण इसकी पुष्टि नहीं हो सकी कि क्या कोई अन्य अंग भी दान किये गये हैं। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में ब्रह्माकुमारीज द्वारा एक भोग और प्रार्थना अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा जिसमें वे व्यंजन तैयार किए जाएंगे जो हरीश को पसंद थे।
उन्होंने कहा, ''हरीश एक दशक से अधिक समय तक खाना नहीं खा सके। अब आत्मा मुक्त है। प्रतीकात्मक रूप से, हम वह भोजन उपलब्ध कराएंगे जो उनके शरीर को प्रिय था।'' उच्चतम न्यायालय ने 11 मार्च को एक ऐतिहासिक फैसले में हरीश राणा के लिए निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। पंजाब विश्वविद्यालय में बीटेक के छात्र हरीश 2013 में चौथी मंजिल की बालकनी से गिर गए थे और उन्हें सिर में गंभीर चोटें आई थीं। तब से वह कोमा में थे। हरीश का 13 साल से अधिक समय तक कोमा में रहने के बाद एम्स-दिल्ली में मंगलवार को निधन हो गया था। निष्क्रिय इच्छामृत्यु का अर्थ है कि मरणासन्न या लाइलाज बीमारी से जूझ रहे किसी मरीज को जीवित रखने वाली चिकित्सा सहायता को रोकने या जीवनरक्षक प्रणाली को हटाने की अनुमति देना, ताकि उसकी स्वाभाविक रूप से मौत हो सके।
जानें कब क्या हुआः
- 20 अगस्त 2013: चंडीगढ़ हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर चोटिल
- 2022: माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की
- 8 जुलाई 2024: हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी
- 15 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
- 11 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति प्रदान की
- 14 मार्च 2026: हरीश को एम्स दिल्ली में भर्ती कराया गया
- 24 मार्च 2026: एम्स में हरीश राणा का निधन
