ईरान युद्ध और होर्मुज को लेकर जी7 बैठक में हुई चर्चा, पेरिस में जुटे दुनियाभर के विदेश मंत्री, जानिए क्या बोले एस. जयशंकर 

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Published By Anjali Singh
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दिल्ली। जब दुनिया पश्चिम एशियाई संघर्ष के विनाशकारी परिणामों से जूझ रही थी तब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऊर्जा, खाद्य और ईंधन सुरक्षा को लेकर वैश्विक दक्षिण के देशों की चिंताओं को उठाया तथा साथ ही वैश्विक शासन सुधारों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। फ्रांस में बृहस्पतिवार को जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न अनिश्चितताओं के मद्देनजर टिकाउ व्यापार गलियारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व के बारे में भी बात की। हालांकि भारत जी7 का सदस्य नहीं है, लेकिन इसके वर्तमान अध्यक्ष फ्रांस ने उसे भागीदार देश के रूप में आमंत्रित किया है। 

दुनियाभर के विदेश मंत्री जुटे 

फ्रांस ने भारत के अलावा सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया और ब्राजील को अब्बे डेस-वॉक्स-डे-सेर्ने में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। जी7 बैठक की शुरुआत में जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और यूक्रेनी विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा के साथ अलग-अलग बातचीत की। ऐसा माना जाता है कि इन बातचीत में पश्चिम एशिया संकट पर प्रमुखता से चर्चा हुई। 

जयशंकर ने नेपाल के विदेश मंत्री को बधाई दी 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को नेपाल के अपने समकक्ष शिसिर खनाल को बधाई दी और पारंपरिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने की उम्मीद जताई। जयशंकर ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नेपाल के विदेश मंत्री के रूप में पदभार ग्रहण करने पर शिसिर खनाल को हार्दिक शुभकामनाएं।'' 

नेपाल के नये प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह 'बालेन' ने शुक्रवार को अपने मंत्रियों के साथ काठमांडू में राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास शीतल निवास में आयोजित विशेष समारोह में शपथ ली। जयशंकर ने कहा, ''अपनी पारंपरिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।'' बालेन नेपाल में इस पद के लिए लोकतांत्रिक रूप से चुने गये सबसे युवा नेता हैं और वह मधेश क्षेत्र से प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति भी हैं। 

जी7 की बैठक में ईरान युद्ध पर चर्चा हुई

फ्रांस में शुक्रवार को जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक हुई जिसमें पश्चिम एशिया के संघर्ष और रूस तथा यूक्रेन के बीच जारी युद्ध पर चर्चा की गई। इस बैठक में ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध को लेकर गहरे मतभेद स्पष्ट रूप से सामने आए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बार-बार की गई शिकायतों के बाद ये मतभेद सामने आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा है कि अमेरिका के सहयोगियों ने ईरान की जवाबी कार्रवाई का सामना करने में मदद के अनुरोध को नजरअंदाज या अस्वीकार कर दिया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जी7 देशों के अपने समकक्षों के साथ इस बैठक में शामिल हुए।

ईरान युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश करने और संकट को समाप्त करने के लिए संभावित वार्ताओं की स्थिति को लेकर अनिश्चितता के साथ तेल बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का ''शीघ्र समाधान'' करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आह्वान किया है। कूपर ने कहा कि ईरान सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल टैंकरों को अवरुद्ध करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है। 

जी7 समूह में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। ट्रंप ने कहा, ''हम उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) से बहुत निराश हैं क्योंकि नाटो ने बिल्कुल कुछ नहीं किया है।'' रुबियो ने कहा, ''सच कहूं तो, मुझे लगता है कि दुनिया भर के देशों को, यहां तक ​​कि उन देशों को भी जो इस बारे में थोड़ी बहुत शिकायत कर रहे हैं, वास्तव में आभारी होना चाहिए कि अमेरिका के पास एक ऐसा राष्ट्रपति है जो इस तरह के खतरे का सामना करने के लिए तैयार है

ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था को 'बंधक' बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती  

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का ''शीघ्र समाधान'' करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का आह्वान किया है। पेरिस के बाहरी इलाके में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए, कूपर ने कहा कि ईरान सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल टैंकरों को अवरुद्ध करके वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है। उन्होंने कहा, ''स्पष्ट रूप से कहें तो, ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती जो अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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