ट्रंप ने दी ईरान को तेल बिक्री की छूट, होर्मुज तनाव के बीच 14 करोड़ बैरल बाजार में उतारने की तैयारी

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
On

वॉशिंगटन/तेहरानः पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चौथे सप्ताह में प्रवेश के बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता कम करने के लिए ईरान को अस्थायी रूप से लगभग 14 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचने की अनुमति दे दी है। शुक्रवार देर रात जारी इस छूट के तहत तेहरान टैंकरों में संग्रहित तेल को बाजार में उतार सकेगा, जो वैश्विक मांग के करीब डेढ़ दिन के बराबर है। यह फैसला होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण पैदा हुई आपूर्ति चिंताओं को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। एक ओर ट्रंप ने तनाव कम करने के संकेत देते हुए ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों को समेटने की बात कही।

उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपने सैन्य लक्ष्यों को पूरा करने के "काफी करीब" पहुंच गया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ईरान की मिसाइल क्षमता, लॉन्चर और रक्षा औद्योगिक ढांचे को "पूरी तरह कमजोर" कर रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना और क्षेत्र में सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि अमेरिका इज़राइल, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत जैसे सहयोगियों की सुरक्षा बहाल करने के करीब पहुंच गया है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रबंधन को लेकर ट्रंप ने कहा कि इसका नियंत्रण और निगरानी उन देशों को करनी चाहिए जो इसका उपयोग करते हैं। उन्होंने जोड़ा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सहयोग करेगा।

हालांकि, क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। हजारों अतिरिक्त अमेरिकी मरीन और नौसैनिक कर्मियों की तैनाती की जा रही है, जो सैन्य तैयारी को दर्शाता है। इस बीच, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया में अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया, जिसे अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार विफल कर दिया गया। बहरीन होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रयासों का समर्थन करने वाला पहला क्षेत्रीय देश बन गया है, जबकि यूरोपीय देशों, जापान और कनाडा ने भी समर्थन जताया है।

हालांकि अब तक किसी देश ने नौसैनिक तैनाती को लेकर ठोस प्रतिबद्धता नहीं दी है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात को चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी में उसके कब्जे वाले द्वीपों पर हमला हुआ तो वह रस अल-खैमाह जैसे बंदरगाह शहरों को निशाना बना सकता है। वहीं कुवैत और सऊदी अरब ने मिसाइल और ड्रोन हमलों को नाकाम करने की जानकारी दी है। ईरान ने इजरायल पर मिसाइलों से हमले किये हैं जिसके जवाब में इजरायल ने बेरूत में हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।

संबंधित समाचार