UP में दो दिन की अफरातफरी के बाद ईंधन आपूर्ति पहले से हुई बेहतर, लेकिन LPG वितरण अब भी प्रभावित

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
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लखनऊ। दो दिनों तक चली घबराहट में हुई खरीदारी के बाद उत्तर प्रदेश में ईंधन आपूर्ति की स्थिति अब काफी हद तक सामान्य हो गई है। राज्य की राजधानी लखनऊ सहित अधिकांश शहरी इलाकों में रविवार तक हालात लगभग सामान्य हो गए, हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों और घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरण में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।शनिवार और रविवार को पेट्रोल पंपों पर पहले जैसी लंबी कतारें और अफरा-तफरी नहीं दिखी।

लखनऊ में दोपहर बाद तक अधिकांश पंपों पर सामान्य रूप से वाहन ईंधन भरवाते नजर आए। अधिकारियों और पेट्रोल पंप संचालकों ने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल की कोई वास्तविक कमी नहीं थी, बल्कि अफवाहों के कारण मांग अचानक बढ़ गई थी। लखनऊ के जानकीपुरम, विकास नगर और मड़ियांव जैसे इलाकों में, जहां पहले भारी भीड़ देखी गई थी, अब स्थिति पूरी तरह सामान्य रही। यहां ग्राहकों को बिना इंतजार के आसानी से ईंधन मिल रहा है।

डीलरों के मुताबिक, सप्ताह की शुरुआत में बिक्री में जो असामान्य बढ़ोतरी हुई थी, वह अब घटकर सामान्य स्तर के करीब आ गई है। राज्य भर के आंकड़ों के अनुसार 24 से 27 मार्च के बीच पेट्रोल-डीजल की खपत में तेज उछाल दर्ज किया गया। 24 मार्च को पेट्रोल की बिक्री 19 प्रतिशत, 25 मार्च को 36 प्रतिशत और 26 मार्च को 77 प्रतिशत तक बढ़ गई। 27 मार्च को भी यह 70 प्रतिशत अधिक रही, जो 26 मार्च से सात प्रतिशत कम थी। 26 मार्च को पेट्रोल की बिक्री 2.9 करोड़ लीटर तक पहुंच गई थी, जो 27 मार्च को घटकर 2.78 करोड़ लीटर रह गई।

इसी तरह डीजल की खपत भी 36 प्रतिशत, 77 प्रतिशत और 75 प्रतिशत तक बढ़ी, जबकि 26 मार्च को यह 5.1 करोड़ लीटर तक पहुंच गई थी। गोरखपुर रीजन में भी स्थिति में सुधार देखा गया। हालांकि देवरिया और गोरखपुर के कुछ ग्रामीण इलाकों में टैंकरों की आवाजाही में देरी के कारण आंशिक दिक्कतें बनी रहीं। प्रयागराज में भी अधिकांश पेट्रोल पंपों पर स्थिति सामान्य रही।

कमला नगर, कटरा, अलोपीबाग, सोहबतियाबाग, मीरापुर, करेली और सिविल लाइंस जैसे इलाकों में कहीं भी भीड़ नहीं दिखी और लोग सामान्य रूप से ईंधन भरवा रहे थे। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति अब भी परेशानी का कारण बनी हुई है। राम नवमी के मौके पर भी कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर समय पर नहीं मिल पाया।

केवाईसी सत्यापन की अनिवार्यता ने भी प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। आंकड़ों के अनुसार 26 मार्च को 13.7 लाख एलपीजी बुकिंग हुई थी, जो 27 मार्च को घटकर 11.17 लाख रह गई। उसी दिन करीब 7.13 लाख सिलेंडरों की डिलीवरी की गई, लेकिन कई जगहों पर देरी की शिकायतें मिलीं। वाराणसी और कानपुर में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी गईं।

ग्रामीण क्षेत्रों में डीजल की मांग अधिक रहने से दबाव बना रहा, क्योंकि किसान कृषि कार्यों के लिए थोक में डीजल ले रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डीलरों ने एक बार में सीमित मात्रा में ईंधन देने की व्यवस्था लागू की। उत्तर प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स के अनुरोध पर अधिक भीड़ वाले पेट्रोल पंपों पर पुलिस तैनात की गई, जिससे व्यवस्था सुचारु रही। साथ ही 600 से अधिक अतिरिक्त टैंकरों की आपूर्ति भी सुनिश्चित की गई।

आईओसीएल के अधिकारियों ने बताया कि पूरे समय आपूर्ति व्यवस्था बनी रही और जरूरत पड़ने पर तुरंत टैंकर भेजे गए। कुछ जगहों जैसे आगरा और लखीमपुर खीरी से अनियमितताओं की शिकायतें भी सामने आईं, लेकिन प्रशासन ने इन्हें अपवाद बताते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया। पूरे प्रदेश में हालात काफी सुधर गए। कतारें खत्म हो गईं, आपूर्ति सामान्य हो गई और लोगों में जागरूकता बढ़ने से स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ गई है। 

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