36 हजार करोड़ से ज्यादा का ऑटो रिक्शा बाजार
कॉम्पैक्ट डिजाइन, संकरी गलियों में सुगमता और कम दूरी की यात्रा में उपयोगिता के कारण ऑटो रिक्शा (थ्री व्हीलर) अब देश के छोटे-छोटे शहरों में परिवहन का महत्वपूर्ण सर्व सुलभ साधन बन चुके हैं। बड़े शहरों में भी यातायात जाम वाले तथा बड़े वाहनों के लिए प्रतिबंध वाले इलाकों में आवाजाही और माल ढुलाई में ऑटो रिक्शा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों के चलते देश में ऑटो रिक्शा का बाजार जो कि साल 2025 में लगभग 36,000 करोड़ रुपये था, इसके 2031 तक 70,000 करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। इस बढ़ती मांग में मुख्य रूप से इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा का रुझान तेजी से बढ़ रहा है। इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा की हिस्सेदारी 2030 तक 65-75% तक होने का अनुमान है।
बजाज ऑटो इस बाजार का अग्रणी ब्रांड है, जो 60% से अधिक हिस्सेदारी रखता है। इसके बाद महिंद्रा और पियाजियो का स्थान है। पिछले वित्त वर्ष में ऑटो रिक्शा की बिक्री ने करीब 8 लाख यूनिट्स के साथ एक नया रिकॉर्ड बनाया था। इस आंकड़े के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बाजार बन गया है। 2025 में वैश्विक इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बिक्री में भारत की हिस्सेदारी करीब 60% रही है।
दुनिया को ‘ऑटो रिक्शा’ शब्द भारत ने दिया
ऑटो रिक्शा से हर किसी की यादें जुड़ी हैं। दुनिया को ‘ऑटो रिक्शा’ शब्द भारत की ही देन है। वर्ष 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली और कई उद्योगपतियों ने देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम शुरू किया। वर्ष 1948 में फिरोडिया ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को अपना ऑटो-रिक्शा दिखाया।
फिरोडिया ने इसके लिए उस समय बछराज ट्रेडिंग कारपोरेशन के के साथ जॉइंट वेंचर बनाया था, बाद में यही कंपनी बजाज ऑटो के नाम से जानी गई। उस समय देश में उत्पादन के लिए लाइसेंस लेना होता था। बजाज ऑटो को सालाना 1,000 ऑटो रिक्शा बनाने का लाइसेंस मिला था।
