संपादकीय:उपलब्धि की उड़ान

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Published By Monis Khan
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उत्तर प्रदेश के जेवर में निर्मित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का शुभारंभ केवल एक अवसंरचनात्मक उपलब्धि के साथ ही ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की परिकल्पना का सशक्त उद्घोष है। लगभग 11,200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के दबाव को कम करते हुए उत्तर भारत के एक नए एविएशन हब के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। यह परियोजना ‘विकसित भारत–2047’ के लक्ष्य के अनुरूप है, जहां क्षेत्रीय संतुलित विकास, लॉजिस्टिक्स दक्षता और वैश्विक कनेक्टिविटी को प्राथमिकता दी जा रही है। 

उत्तर प्रदेश में पहले से लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, कुशीनगर, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, बरेली, हिंडन जैसे सक्रिय हवाई अड्डे हैं। छोटे-बड़े मिलाकर प्रदेश में एक दर्जन से अधिक सक्रिय एयरपोर्ट हो चुके हैं, जबकि कुछ हवाई पट्टियों से उड़ानें सीमित या अस्थायी रूप से बंद भी रही हैं, जिनका पुनरुद्धार ‘उड़ान योजना’ के तहत किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट का कार्गो टर्मिनल विशेष महत्व रखता है। 

इसके संचालन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश, विशेषकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा, अलीगढ़, मेरठ के उद्योगों, कृषि-उत्पादों और ई-कॉमर्स को वैश्विक बाजार तक तेज पहुंच मिलेगी। यदि उद्घाटन के पहले आवश्यक सुरक्षा और परिचालन मंजूरियां पूरी हो जातीं हैं, तो कार्गो ढुलाई शीघ्र शुरू हो सकती थी, अब इसमें कुछ समय लगेगा। सुरक्षा के दृष्टिकोण से ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी की मंजूरी अनिवार्य है। इसके बिना न तो नियमित टिकट बुकिंग शुरू हो सकती है और न ही पूर्ण पैमाने पर कार्गो संचालन। इन प्रक्रियाओं से पहले हुए उद्घाटन को पूर्ण संचालन की शुरुआत अथवा लोकार्पण के बजाए ‘राजनीतिक-संकेतात्मक’ उद्घाटन  कहना बहुत अनुचित नहीं। 

40 एकड़ में प्रस्तावित मेंटीनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल सुविधा इस परियोजना की सबसे दूरगामी उपलब्धियों में से एक है। भारत अब तक विमान रखरखाव के लिए विदेशों पर निर्भर रहा है। यह केंद्र उत्तर प्रदेश को एविएशन सेवा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएगा, रोजगार सृजित करेगा और विदेशी मुद्रा की बचत भी करेगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती कनेक्टिविटी है। दिल्ली से मात्र 70 किमी दूरी के बावजूद यदि यात्री को महंगे टैक्सी किराए पर निर्भर रहना पड़े, तो ‘हवाई चप्पल वाले’ आम नागरिक के लिए हवाई यात्रा महंगी हो जाएगी। 

फिलहाल मेट्रो विस्तार, रैपिड रेल, एक्सप्रेसवे बस सेवाएं और रेलवे लिंक प्रस्तावित हैं, लेकिन ये कब पूरी होंगी, अनुमान लगाना मुश्किल है। फिर भी, इस उपलब्धि को कम करके नहीं आंका जा सकता। यह एयरपोर्ट न केवल निवेश आकर्षित करेगा, बल्कि पर्यटन, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र में व्यापक आर्थिक गतिविधियों को गति देगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जो पहले दिल्ली पर निर्भर था, अब स्वयं एक आर्थिक केंद्र के रूप में उभर सकता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘उत्तम प्रदेश’ की परिकल्पना में यह परियोजना एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, परंतु असली परीक्षा अब शुरू होती है, कनेक्टिविटी को किफायती बनाना, मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट को जोड़ना और संचालन को पारदर्शी व कुशल बनाना।