श्वेत क्रांति का कमाल: तराई में 51 हजार महिलाएं बनीं उद्यमी, 250 करोड़ का कारोबार

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Published By Muskan Dixit
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1500 गांवों में फैला दुग्ध व्यवसाय, छह जिलों में महिलाओं ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर

लखनऊ, अमृत विचार: प्रदेश के तराई क्षेत्र में आई श्वेतक्रांति ने महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। बरेली, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, सीतापुर और रामपुर समेत छह जिलों के 1500 गांवों में 51 हजार महिलाएं दुग्ध व्यवसाय के जरिए उद्यमी बन चुकी हैं।

इन महिलाओं के खातों में हर महीने 3, 13 और 23 तारीख को नियमित भुगतान पहुंच रहा है, जिससे उनकी आय स्थिर और भरोसेमंद बनी है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं उत्पादन से लेकर संग्रहण और विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सृजनी एमपीसीएल के नेतृत्व में तराई क्षेत्र में प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रहण और बिक्री हो रही है। अब तक महिलाएं सवा दो सौ करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी हैं। जो क्षेत्र पहले पिछड़े माने जाते थे, वे अब महिला उद्यमिता के नए केंद्र बन गए हैं। तराई की यह श्वेतक्रांति केवल आर्थिक उन्नति नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का भी मजबूत उदाहरण बन रही है, जहां महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।

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