20 बम फेंके, फायरिंग भी हुई किसी को खरोंच तक नहीं आई... पुलिसिया कहानी अदालत में फुस्स, गैंगस्टर के 12 आरोपी दोष मुक्त

Amrit Vichar Network
Published By Muskan Dixit
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अयोध्या, अमृत विचार : 20 बम फेंके, फायरिंग भी हुई किसी को खरोंच तक नहीं आई। घटना जिले में चौक की दिनदहाड़े बताई गई। जिस मुकदमे में आरोपी को पुलिस गिरफ्तार करने गई उसमें वह खुद फाइनल रिपोर्ट लगा चुकी थी। आरोपियों ने एक बम स्कूटर पर भी फेंका पूरा स्कूटर क्षतिग्रस्त हो गया लेकिन पुलिस ने पूरी विवेचना में स्कूटर किसका था यह नहीं बता पाई व स्कूटर को कब्जे में भी नहीं लिया। मौके से बरामद ईट-पत्थर के टुकड़े और बम के टुकड़े अदालत में पेश नहीं किए गए। यही नहीं गैंग चार्ट का अनुमोदन करने वाले जिलाधिकारी को पुलिस ने गवाह ही नहीं बनाया। परिणाम रहा कि कोर्ट ने 12 गैंगस्टर के आरोपियों को बरी कर दिया।

फैसला विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर जज प्रतिभा नारायण की अदालत से गुरुवार को हुआ। फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता सईद खान ने बताया कि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 21 नवंबर 2001 की दोपहर कोतवाली नगर की पुलिस लूट के आरोपी परवेज को गिरफ्तार करने उसकी चौक स्थित दुकान पर गई। पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तो उसके 20-25 साथी जो चौक के व्यापारी ही थे, ने पुलिस वालों को घेर लिया। पुलिस वालों पर 20 बम फेंके 17 राउंड फायरिंग की और परवेज को छुड़ा ले गए। पुलिस ने इस घटना की रिपोर्ट मोहम्मद शरीफ, मोहम्मद सईद, फैसल, गुड्डू उर्फ अयाज, तौहीद, करीम ,रफीक, नाटे, पप्पू कुंजडा, परवेज, जावेद के खिलाफ नामजद तथा 20-25 अज्ञात के खिलाफ जानलेवा हमले में दर्ज कराई।

इसके बाद पुलिस ने इस मामले को सनसनीखेज बताते हुए सभी आरोपियों पर गिरोह बंद अधिनियम के तहत कार्रवाई भी की। अदालत में गवाही के दौरान पता चला कि जिस मुकदमे में पुलिस परवेज को गिरफ्तार करने गई थी, उसमें कुछ दिन पहले ही क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई थी। यह पूरी कहानी इसलिए बनाई गई कि अब्दुल खालिद को सिपाही संजय दुबे ने अवैध वसूली के चक्कर में पीटा था, जिससे उसकी मौत हो गई। सिपाही के खिलाफ कार्रवाई के लिए व्यापारी धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इस कहानी को छिपाने के लिए पुलिस ने दूसरी कहानी बना तो दी लेकिन उसे अदालत में साबित नहीं कर पाई। इसके चलते कोर्ट ने 12 गैंगस्टर के आरोपियों को बरी कर दिया।

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