खाद आपूर्ति पर योगी सरकार सख्त : जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई के दिए गए निर्देश

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Published By Deepak Mishra
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यूरिया, डीएपी और एनपीके की पर्याप्त उपलब्धता पर सरकार का फोकस

लखनऊ, अमृत विचार : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2026 से विस्तृत योजना तैयार की गई है। इसका उद्देश्य प्रदेश में उर्वरकों की कमी को रोकना और कृषि कार्यों को निर्बाध बनाए रखना है। जमाखोरी और कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही गैर-कृषि क्षेत्रों में उर्वरकों के दुरुपयोग और डायवर्जन पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।

सरकार की रणनीति के तहत यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों को प्रत्येक जिले में मांग के अनुसार अग्रिम आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि बुवाई और फसल वृद्धि के दौरान किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो। खाद वितरण को पारदर्शी बनाने के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समितियां गठित की जाएंगी, जिनमें कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।

प्रदेश के समस्त उर्वरक बिक्री केंद्रों पर कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर पारदर्शिता के साथ वितरण कराया जाएगा। उर्वरकों की जमाखोरी कर कृत्रिम अभाव करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि गैर कृषि क्षेत्रों में उर्वरकों के डायवर्जन यथा-प्लाईवुड इंडस्ट्रियल, पशु आहार निर्मित इकाइयों पर सघन निगरानी रखी जाए। फसल में संस्तुति व संतुलित मात्रा में (अधिकतम यूरिया 7 बोरी एवं डीएपी-5 बोरी प्रति हेक्टेयर) उर्वरकों का प्रयोग करने के साथ-साथ उर्वरकों का अग्रिम भंडारण न करने के संबंध में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाए। अन्तर्राज्यीय सीमावर्ती जिलों में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की सघन निगरानी रखी जाए।

सहकारी संस्थाओं से भी खाद वितरण का निर्णय

इस योजना में सहकारी समितियों की भूमिका को और मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार ने सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खाद वितरण की हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे पारदर्शिता और सुगमता दोनों में सुधार होगा। वहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी को संतुलित रखते हुए उन्हें लगभग 35 प्रतिशत कोटा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि सप्लाई चेन प्रभावी बनी रहे।

जिला स्तर पर होगीं नियमित समीक्षा बैठकें

खाद वितरण की निगरानी के लिए सरकार ने सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लागू की है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखी जाएगी। इस सुनियोजित रणनीति से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होगी, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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