Bareilly: लिलौर झील में घुमक्कड़ी के सपने धड़ाम, टॉय ट्रेन के पहिए जाम
बरेली, अमृत विचार। पर्यटन विभाग ने पिछले साल जब रामनगर की ऐतिहासिक लिलौर झील किनारे टॉय ट्रेन का संचालन शुरू किया तो ऐसा लगा कि शिमला यहां उतर आया हो, लेकिन अब इस ट्रेन के हालात खराब हैं। ग्राम पंचायत टॉय (फैमिली ट्रेन) का रखरखाव ठीक से नहीं कर रही है। शनिवार को लिलौर झील की फैमिली ट्रेन के संचालन की स्थिति परखी गई तो पांच डिब्बों की ट्रेन में दो डिब्बे खराब खड़े थे। उनके टायरों की हवा निकली हुई थी। माना जा रहा है कि दोनों डिब्बों के टायर वाले पहिये पंक्चर हो गए हैं। मौके पर केयर टेकर भी नहीं मिला।
दरअसल, साल 5 नवंबर को पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार ने कमिश्नर भूपेंद्र एस. चौधरी, डीएम अविनाश सिंह आदि की मौजूदगी में रामनगर स्थित ऐतिहासिक लिलौर झील में टॉय ट्रेन और बोटिंग का शुभारंभ किया था। उस दौरान यह भी दावे किए गए कि एक किलोमीटर के दायरे में ट्रेन को संचालित किया जाएगा। उसके बाद इसे 52 हेक्टेयर में फैली झील के चारों तरफ चलाने की योजना को शामिल किया गया था। इधर, आंवला के तहसीलदार ब्रजेश वर्मा का कहना है कि टॉय ट्रेन का संचालन ग्राम पंचायत को दिया गया है। पंचायत ही संचालन कर रही है। यदि ट्रेन के डिब्बों के पहिये खराब हैं तो दिखवाकर ठीक करा दिया जाएगा।
लिलौर झील का पर्यटन विकास के लिए शासन ने धनराशि स्वीकृत की है, पर्यटन विभाग उसे देख रहा है। क्या-क्या कार्य होंगे, इसकी कार्ययोजना आने पर जानकारी होगी। वहीं, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के अधिशासी अभियंता विनय शर्मा का कहना है कि ट्रेन का संचालन किया जा रहा है। रेवेन्यू वसूलने का कार्य विभाग का नहीं है। हम एजेंसी हैं।
ये कार्य हैं प्रस्तावित
लीलौर झील व ढिलवारी प्राचीन राम कटोरा ताल का ईको पर्यटन विकास करने के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति पिछले माह ही मिली। सवा दो करोड़ रुपये आवंटित भी हुए। ईको पर्यटन विकास कराने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड ने 299.98 लाख रुपये का आगणन भेजा। जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 में ईको टूरिज्म का विकास के अन्तर्गत 295.17 लाख की स्वीकृति प्रदान की गयी।
