यूपी का ‘गो-इकोनॉमी’ मॉडल बना ग्लोबल ब्रांड... UK, USA ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों तक पहुंच रहे यूपी के गो उत्पाद
एक हजार से ज्यादा देशी गायों के सहारे खड़ा हुआ 10 करोड़ का सालाना कारोबार
लखनऊ, अमृत विचार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ‘गो संरक्षण से समृद्धि’ मॉडल अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उत्तर प्रदेश में देशी गायों के सहारे तैयार एथिकल डेयरी मॉडल ने यूके, यूएसए, ऑस्ट्रेलिया समेत 10 से अधिक देशों में यूपी का डंका बजाया है। ‘हेता’ के जरिए एक हजार से ज्यादा देशी गायों पर आधारित यह मॉडल अब करीब 10 करोड़ रुपये के सालाना कारोबार तक पहुंच चुका है।
गाजियाबाद के सिकंदरपुर निवासी असीम रावत ने मुख्यमंत्री योगी की प्रेरणा से इस अभियान की शुरुआत की। अमेरिका समेत कई देशों की सॉफ्टवेयर कंपनियों में 14 वर्ष तक इंजीनियर के रूप में काम करने के बाद उन्होंने गो संरक्षण को मिशन बनाया। आज 100 लोगों की टीम के साथ वह देशी गायों पर आधारित उत्पादों को ग्लोबल ब्रांड के रूप में स्थापित कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मॉडल से संरक्षित साहीवाल गाय की आरती और गोपूजन कर चुके हैं।
हेता मॉडल के तहत ए2 दूध, बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, शतधौत घृत, कुकीज, लड्डू, हर्बल चाय, स्किन-हेयर केयर और गोमूत्र अर्क समेत करीब 150 प्रकार के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। ये उत्पाद भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, सिंगापुर और दुबई तक पहुंच रहे हैं।
वृद्ध गोवंश को भी बनाया आर्थिक मॉडल का हिस्सा
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां वृद्ध गोवंश को बोझ नहीं माना जाता। उन्हें संरक्षण व्यवस्था का हिस्सा बनाकर गो आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया है। देशी नस्लों के समग्र उपयोग के जरिए डेयरी, पंचगव्य, आयुर्वेदिक और ऑर्गेनिक उत्पादों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है। इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है।
सरकार दे रही सब्सिडी और नीतिगत समर्थन: एसीएस
पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम के अनुसार योगी सरकार स्वदेशी नस्लों के संरक्षण और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर सहायता दे रही है। ‘ऑपरेशन-4’ के तहत देशी गायों के पालन पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। डेयरी मास्टर प्लान के अंतर्गत 2 से 25 गायों तक पशुपालकों को लाखों रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार साहीवाल, गिर, गंगातीरी और सिंधी नस्लों के विस्तार पर विशेष फोकस कर रही है।
