अमेरिकी नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगे 150 करोड़, चार गिरफ्तार

Amrit Vichar Network
Edited By Indrabhushan Dubey
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विभूतिखंड पुलिस व क्राइम ब्रांच ने एक और फर्जी कॉल सेंटर का किया खुलासा

कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: राजधानी में अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर खोलकर साइबर ठगी के गिरोह पॅाश व्यावसायिक इलाकों में पनप रहे हैं। 23 दिन के अंदर तीन बड़े मामले सामने आये हैं। विभूतिखंड पुलिस व क्राइम ब्रांच ने बुधवार देर रात साइबर हाइट्स में छापा मारकर साइबर ठगों के गिरोह का खुलासा किया है। गिरोह अमेरिकी बुजुर्ग नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट कर पिछले छह माह के अंदर 150 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुके हैं। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि 35 से पूछताछ कर छोड़ दिया है। यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट कर डॉलर में ठगी करता था।

डीसीपी पूर्वी डॉ. दीक्षा शर्मा के मुताबिक, 22 जुलाई की रात साइबर हाइट्स की चौथी मंजिल पर जलवा बार के सामने विभूतिखंड पुलिस व क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने छापा मारा। चौथी मंजिल स्थित फ्लैट नंबर 420ए में विदेशी नागरिकों को ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर संचालित होता पाया गया। रात करीब तीन बजे हुई छापेमारी में 40 लोगों को हिरासत में लिया गया। अंदर काफी संख्या में कंप्यूटर पर युवक-युवतियां विदेशों में फोन कर रहे थे। पूछताछ के बाद प्रतापगढ़ निवासी सूरज त्रिपाठी, उसके मामा राहुल त्रिपाठी, बुआ के बेटे विवेक पांडेय और मुंबई निवासी तकनीकी विशेषज्ञ आकाश अरुण दत्ता उर्फ रिक्की को गिरफ्तार किया गया। वहीं, अन्य 35 लोगों के नाम व पते दर्ज कर पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है।

12 वर्ष पूर्व सरगना अहमदाबाद कॉल सेंटर में करता था काम

एसीपी विभूतिखंड सौम्या पांडेय ने बताया कि गिरफ्तार सरगना से पूछताछ की गई। सूरज पूरे गिरोह का सरगना था, जबकि आकाश फर्जी वेबसाइट और इंटरनेट आधारित दूरभाष व्यवस्था संभालता था। विवेक और राहुल कर्मचारियों की भर्ती, संचालन और प्रबंधन का काम देखते थे। सूरज त्रिपाठी वर्ष 2012-13 में अहमदाबाद में इसी तरह के कॉल सेंटर में काम कर चुका था। वहीं से उसने इस धंधे की बारीकियां सीखीं और बाद में रिश्तेदारों व तकनीकी विशेषज्ञ की मदद से राजधानी में पूरा नेटवर्क खड़ा कर दिया। ठगी की रकम पहले अमेरिका में मौजूद गिरोह के सदस्य इकट्ठा करते थे। बाद में हवाला के जरिए पैसा लखनऊ भेजा जाता था। कर्मचारियों को भी नकद भुगतान किया जाता था, ताकि लेन-देन का कोई रिकार्ड न मिले। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह प्रतिदिन चार से पांच हजार अमेरिकी डालर तक की ठगी करता था।

जांच व सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी बनकर डराते

इंस्पेक्टर विभूतिखंड उपेंद्र सिंह के मुताबिक, जांच में सामने आया कि गिरोह ने एप्पल ग्राहक सहायता के नाम से फर्जी वेबसाइट तैयार कर रखी थी। इंटरनेट पर विज्ञापन के जरिए इसे ऊपर दिखाया जाता था। अमेरिका से मदद के लिए फोन करने वाले लोगों की काल सीधे लखनऊ पहुंचती थी। पहले कर्मचारी खुद को ग्राहक सहायता अधिकारी बताते थे, फिर दूसरे सदस्य अमेरिकी सरकारी एजेंसी या सर्वोच्च न्यायालय का अधिकारी बनकर लोगों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते थे। कई बार इनाम या तकनीकी सहायता का झांसा देकर भी लोगों को फंसाया जाता था। इसके बाद गिफ्ट कार्ड, सोना या नकदी के रूप में रकम ऐंठ ली जाती थी।

नेपाल से बुलाए गए कर्मचारी

एसीपी सौम्या पांडेय के मुताबिक, छापे के दौरान 35 कार्यस्थल संचालित मिले। जहां 35 कर्मचारी (चार युवती और 31 युवक) काम कर रहे थे। इनमें सबसे अधिक 10 उत्तराखंड और 9 महाराष्ट्र के युवक-युवतियां थे। इसके अलावा 3 गुजरात, 3 नागालैंड, 2 असम, 2 मणिपुर के शामिल थे। वहीं पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और नेपाल के एक-एक लोग कार्यरत मिले। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इन कर्मचारियों को ठगी की जानकारी थी या उन्हें सामान्य नौकरी बताकर रखा गया था। इन सभी लोगों के पुलिस ने बयान दर्ज कर लिए हैं। इन सभी लोगों को आरोपितों के खिलाफ गवाह के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

31 लैपटाप और 18.50 लाख रुपये बरामद

इंस्पेक्टर उपेंद्र ने बताया कि छापेमारी में 31 लैपटाप, 14 मोबाइल फोन, दो राउटर, बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और सूरज त्रिपाठी की कार से 18.50 लाख रुपये नकद बरामद हुए। फर्जी वेबसाइट से जुड़े दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी पुलिस के हाथ लगे हैं। बरामद सामग्री से गिरोह के अन्य सदस्यों और विदेश में बैठे नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

 

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