राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड : टिन्नू यादव के पास थीं दान पेटियों की चाबियां, पुलिस रिमांड में कई बड़े खुलासे
टिन्नू को थी पूरे परिसर में खुली एंट्री, पुलिस जांच में सामने आए नए तथ्य
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस रिमांड के दौरान मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष यादव से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि दान पेटियों की चाबियां कथित तौर पर टिन्नू के पास थीं और उसे मंदिर परिसर में निर्बाध प्रवेश की सुविधा मिली हुई थी। पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है।
डिजिटल डेस्क, लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में पुलिस को रिमांड के दौरान कई अहम सुराग मिले हैं। मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू' और उसके भतीजे मनीष यादव से 39 घंटे की पुलिस कस्टडी में पूछताछ के दौरान दान पेटियों की चाबियों से लेकर मंदिर परिसर में विशेष पहुंच तक कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
पुलिस ने कोर्ट से 39 घंटे की कस्टडी रिमांड मिलने के बाद शनिवार सुबह दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया था। रविवार तड़के उन्हें उनके आवास और राम जन्मभूमि परिसर भी ले जाया गया, जहां घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (रीकंस्ट्रक्शन) कराया गया। पुलिस लाइंस में दोनों से लगातार पूछताछ जारी रही।
दान पेटियों की चाबियां टिन्नू के पास होने का दावा
जांच में सामने आया है कि राम मंदिर की दान पेटियों की चाबियां कथित तौर पर बिना किसी अधिकृत आदेश के टिन्नू यादव के पास रहती थीं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि ट्रस्ट के एक वरिष्ठ सदस्य ने कथित रूप से बिना औपचारिक प्रक्रिया अपनाए चाबियां उसे कैसे सौंपीं।
मंदिर परिसर में थी निर्बाध आवाजाही
पूछताछ के दौरान पुलिस को यह भी जानकारी मिली कि टिन्नू को राम मंदिर परिसर में किसी भी गेट से आने-जाने की छूट थी। आरोप है कि उसे चढ़ावे की गिनती वाले कक्ष तक भी बिना किसी रोक-टोक के पहुंचने की अनुमति थी।
भतीजे को काउंटिंग टीम में दिलाई थी जगह
पुलिस जांच के अनुसार, टिन्नू ने अपने भतीजे मनीष यादव को कथित तौर पर चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में नियुक्त कराया था। पुलिस पहले ही मनीष यादव के पास से कथित रूप से चुराए गए दो लाख रुपये बरामद कर चुकी है।
कंस्ट्रक्शन कंपनी और नौकरी की भी जांच
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि टिन्नू ने अपनी पत्नी के नाम से एक कंस्ट्रक्शन कंपनी बनाई थी। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि उसके बेटे को राम मंदिर से जुड़े प्रभाव का इस्तेमाल कर लोक निर्माण विभाग (PWD) में नौकरी दिलाई गई या नहीं।
रिमांड पूरी, पूछताछ से और खुलासों की उम्मीद
जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ का उद्देश्य कथित साजिश, धन के लेन-देन और सभी आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट करना है। इससे पहले पुलिस इस मामले के छह अन्य आरोपियों से भी कस्टडी रिमांड के दौरान पूछताछ कर चुकी है। चाचा-भतीजे से हुई पूछताछ को पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में अहम माना जा रहा है।
