अयोध्या : शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 1869 सीटें रह गईं खाली,  3970 सीटों में से केवल 2101 बच्चों का हुआ दाखिला

Amrit Vichar Network
Published By Virendra Pandey
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अयोध्या, अमृत विचार : शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश दिलाने की योजना इस वर्ष अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी। कुल लक्ष्य 3970 सीटों में से मात्र 2101 बच्चों का ही चयन हो पाया है, जबकि 1869 सीटें रिक्त रह गई है। इस तरह लगभग 47 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। चयनित बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश शुरू कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही से बड़ी संख्या में गरीब बच्चे इस बार अधिनियम के तहत निशुल्क प्रवेश से वंचित रह गए।

आरटीई के तहत तीन चरणों में जनवरी, फरवरी और मार्च माह में आवेदन लिए गए थे। जिसके बाद बच्चों का चयन किया गया। पहले चरण में 3062 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 146 आवेदन जन्म प्रमाण पत्र न लगाने और गलत जानकारी देने के कारण निरस्त कर दिए गए। इसके बाद 2916 आवेदनों को लॉटरी प्रक्रिया में शामिल किया गया, जिसमें 1468 बच्चों का चयन हुआ। हालांकि बड़ी संख्या में आवेदन आने के बावजूद सभी सीटें नहीं भर सकी। दूसरे चरण में कुल 698 आवेदन आए। जिनमें 135 आवेदन निरस्त कर दिए गए। शेष 563 आवेदनों को लॉटरी में शामिल किया गया और 426 बच्चों का चयन हुआ। इस चरण में आवेदन संख्या कम होने के साथ ही निरस्तीकरण की दर भी उल्लेखनीय रही। इसी तरह तीसरे और अंतिम चरण में मात्र 306 आवेदन प्राप्त हुए। जिनमें से 44 आवेदन निरस्त किए गए, 262 आवेदनों को लॉटरी प्रक्रिया में शामिल किया गया। जिसमें 227 बच्चों का चयन हुआ। इसके बावजूद कुल सीटों की तुलना में चयन संख्या काफी कम रही।

बीएसए लालचंद ने बताया कि अभिभावकों ने आवेदन करते समय केवल एक ही विद्यालय का चयन किया, जबकि उन्हें अधिकतम 10 विद्यालयों का विकल्प देना था। कई अभिभावकों की तरफ से नामी स्कूलों का ही विकल्प दिया गया या था। सीमित विकल्प देने के कारण सीटें नहीं भर पाईं।

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