मोबाइल-इंटरनेट बिगाड़ रहा मानसिक संतुलन: DQ से पता चलेगा व्यक्ति का व्यव्हार, परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण
कानपुर, अमृत विचार। मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल युवाओं की एकाग्रता पर गहरा असर डाल रहा है। जिससे उनकी मानसिक स्वास्थ्य का संतुलन बिगड़ रहा है। भविष्य में व्यक्ति की क्षमता का आकलन डिजिटल क्वोशेन्ट (डीक्यू) से किया जाएगा। डीक्यू उसे कहते हैं कि जिसमें व्यक्ति के डिजिटल व्यवहार के बारे में पता चलेगा। मोबाइल व इंटरनेट में व्यक्ति कितना समय गुजार रहा है?
क्या सर्च कर रहा है? किस कंटेंट में कितना समय दे रहा है? इन बातों से डीक्यू का पता चल सकेगा। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित फाइटिंग डिजिटल एडिक्शन कार्यक्रम में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने यह बातें कहीं। डीएम ने कहा कि डिजिटल युग में तकनीक का संतुलन ही सफलता का पैमाना होगी।
उसके डिजिटल व्यवहार यानी भी किया जाएगा। डीएम ने कहा कि आईक्यू से काबिलियत परखी जाती थी। अब डिजिटल युग में डीक्यू का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने अटेंशन इकॉनमी का जिक्र करते हुए कहा कि बड़ी तकनीकी कंपनियां लोगों का ध्यान बनाए रखने के लिए मनोविज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। मोबाइल एप और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उपयोगकर्ता बार-बार उन्हें खोलें।
वैज्ञानिक शोध के आधार पर डीएम ने कहा कि डोपामिन हार्मोन के कारण लोग बार-बार स्क्रीन की ओर आकर्षित होते हैं। यही कारण है कि लोग बिना वजह भी फोन चेक करते रहते हैं। उन्होंने युवाओं को डिजिटल अनुशासन अपनाने की सलाह दी और कहा कि सफल अभ्यर्थियों में मोबाइल से दूरी एक सामान्य आदत रही है।
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सृजन श्रीवास्तव ने कहा कि डिजिटल लत मनोवैज्ञानिक समस्या है। जिसे आत्मनियंत्रण पाकर निपटा जा सकता है। इस अवस्था में परिवार की भूमिका महती साबित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार 20 से 40 प्रतिशत युवा इंटरनेट एडिक्शन के जोखिम में हैं।
कैसे पहचाने मोबाइल इडिक्शन:
- बार-बार मोबाइल चेक करना
- नींद में कमी
- चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में ध्यान न लगना
- घंटों ऑनलाइन रहना
- मोबाइल दूर होने पर बेचैनी
- परिवार और मित्रों के साथ समय कम बिताना
- तनाव या तुलना की भावना बढ़ना
- शौक में रुचि कम होना
- आंखों में जलन, सिरदर्द या गर्दन-पीठ दर्द
