लखनऊ : लोहिया संस्थान ने लांच किया एआई ऐप, नवजातों में गंभीर लिवर रोग की समय रहते होगी पहचान
लखनऊ, अमृत विचार : नवजात शिशुओं में होने वाले गंभीर लिवर रोग बिलीरी एट्रेसिया की समय रहते पहचान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मोबाइल ऐप के जरिए संभव हो सकेगी। ‘लिवर पूप’ नामक इस अभिनव ऐप को डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के पीडियाट्रिक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष उपाध्याय ने विकसित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक से बीमारी की शुरुआती पहचान कर ली जाए तो लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता में करीब 20 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बुधवार को इस ऐप का औपचारिक लांच किया। इस मौके पर सीएमएस डॉ. विक्रम सिंह, एमएस डॉ. अरविंद कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
कैसे काम करता है ऐप
डॉ. पीयूष उपाध्याय के अनुसार, परिजन या स्वास्थ्यकर्मी नवजात के मल (स्टूल) की फोटो ऐप पर अपलोड करेंगे। एआई तकनीक के जरिए ऐप मल के रंग और पैटर्न का विश्लेषण कर लिवर से जुड़ी संभावित समस्या का संकेत देता है और डॉक्टर से संपर्क की सलाह भी देता है।
एक साल तक के बच्चों की होगी स्क्रीनिंग
करीब तीन वर्षों की मेहनत से तैयार यह ऐप देश का पहला एआई आधारित है। अध्ययन में इसकी संवेदनशीलता 100 प्रतिशत पाई गई है। यह ऐप एक वर्ष तक के बच्चों में बिलीरी एट्रेसिया की स्क्रीनिंग करने में सक्षम है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि 60 दिनों के भीतर ऑपरेशन हो जाए तो बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है, जबकि 90 दिनों के बाद स्थिति बिगड़ने पर लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचता है।
40 भाषाओं में उपलब्ध होगा
यह ऐप 40 भाषाओं में उपलब्ध होगा, जिनमें 18 भारतीय और 22 विदेशी भाषाएं शामिल हैं। इसे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के उपयोग के लिए भी सरल बनाया गया है। फिलहाल इसे वेबसाइट के माध्यम से इस्तेमाल किया जा सकता है, जल्द ही यह गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर भी उपलब्ध होगा।
क्या है बिलीरी एट्रेसिया
यह एक जन्मजात रोग है, जिसमें नवजात के पित्त नलिकाएं सही तरीके से विकसित नहीं होतीं या बंद रहती हैं। इससे पित्त लिवर में जमा होने लगता है और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाता है।
मुख्य लक्षण
लंबे समय तक पीलिया रहना
त्वचा और आंखों का पीला होना
गहरे रंग का पेशाब
हल्के या सफेद रंग का मल
वजन न बढ़ना और बार-बार बीमार होना
