Bareilly : स्कूल खुले... हंसते-खेलते पहुंचे बच्चों का नए सत्र के पहले दिन स्वागत

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। नए सत्र का पहला दिन था। सुबह की हल्की धूप में स्कूल का गेट बच्चों की चहचहाहट से गूंज रहा था। कई बच्चे अपनी नई यूनिफॉर्म को बार-बार देख रहे थे, तो कोई अपने बैग को कसकर पकड़े था। कई बच्चों की आंखों में आंसू देख खासकर मम्मियां भी भावुक हो गईं। तमाम बच्चे मुस्कान लिए उत्साहित हो स्कूल में गए। जो बच्चे पहली बार स्कूल गए उन्होंने कुछ आनाकानी की। कुछ तो मम्मी-पापा से चिपक कर रोने लगे। बाद में पुचकारने पर ये शर्त रखकर स्कूल गए कि यहीं पर खड़े रहना।

बुधवार सुबह दुर्गा नगर स्थित एक निजी स्कूल के छात्र ने अपनी मम्मी का हाथ कसकर पकड़ रखा था। उसकी आंखों में डर झलक रहा था। मम्मी ने उसे स्कूल में जाने को कहा तो वह कुलबुलाने लगी। अपनी मम्मी को हाथ छोड़ने को तैयार नहीं थी। बहुत पुचकारने पर बोली मम्मा, आप यहीं रहना। मम्मी ने मुस्कुराकर हामी भरी और उसके सिर पर हाथ फेरा। कहा कि मैं यहीं हूं, तुम अंदर जाओ, दोस्त बनाओ।

पास ही खड़ी दूसरी छात्रा हंसते हुए अपने पापा को स्कूल की हर चीज दिखा रही थी, जैसे वह पहले से ही इस जगह को जानती हो। उसके आत्मविश्वास को देखकर उसके पापा की आंखों में चमक दिख रही थी। कुछ कदम दूर, एक बच्चा रोते-रोते अपनी मम्मी से लिपट गया। मम्मी की आंखों में भी आंसू थे, लेकिन उन्होंने खुद को संभालते हुए उसे टीचर के हाथ में सौंप दिया। इसी बीच स्कूल की घंटी बजी और धीरे-धीरे बच्चे अंदर जाने लगे। कुछ बच्चे पीछे मुड़कर बार-बार अपने माता-पिता को देख रहे थे, जैसे यकीन कर लेना चाहते हों कि वे वहीं हैं। कुछ बच्चे अपने भाई बहनों के साथ पहली बार स्कूल गए।

बांटी किताबें, तिलक लगाकर किया स्वागत
परिषदीय स्कूलों के साथ साथ शहर के निजी स्कूलों में सत्र के पहले दिन बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। जिन स्कूलों में सिलेबस पहुंच गया वहां सिलेबस बांटा गया। बच्चों को मिठाई भी खिलाई गई। सरस्वती शिशु मंदिर नैनीताल रोड पर हवन हुआ। इसमें स्कूल अध्यापकों समेत अन्य लोग शामिल हुए। यहां बच्चों का तिलक कर व फूल वर्षा कर स्वागत किया गया।

बच्चों को चुपाती रहीं मैडम
कई स्कूलों में प्री-एनसी के नए एडमिशन वाले बच्चे एक दूसरे को राेता देख खुद भी रोने लगे। ऐसे बच्चों को मैडम ने मिलकर संभाला। उन्हें बहलाने के लिए टॉफी और खिलौने दिए गए। मैडम भी बच्चा बनकर बच्चों को बहलाती रहीं। इसके बाद बच्चे कुछ शांत हुए।

 

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