Meerut News : सीलिंग के खिलाफ मेरठ बंद, बाजारों के साथ चिकित्सा सेवाएं भी ठप
मेरठ। उत्तर प्रदेश में मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में 44 प्रतिष्ठानों की सीलिंग के विरोध में बृहस्पतिवार को शहरव्यापी बंद का व्यापक असर देखने को मिला। व्यापारियों के आह्वान पर शहर के प्रमुख बाजार बंद रहे, वहीं 250 से अधिक निजी अस्पतालों, क्लीनिक और पैथोलॉजी केंद्रों में ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं भी पूरी तरह ठप रहीं, जिससे आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों ने सेंट्रल मार्केट में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। विभिन्न व्यापारी संगठनों के आह्वान पर माधवपुरम, परतापुर, शास्त्री नगर और जागृति विहार समेत कई इलाकों के व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन को समर्थन दिया। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि आवास एवं विकास परिषद की नीतियों ने उनके रोजगार पर सीधा असर डाला है और सरकार से तत्काल समाधान की मांग की।
इस बीच, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और इंडियन डेंटल एसोसिएशन के समर्थन से स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित रहीं। आईएमए पदाधिकारियों के अनुसार सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं बंद रखने का निर्णय लिया गया था। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने पूरे शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। शहर को 31 जोन और 14 सेक्टर में बांटकर पुलिस बल तैनात किया गया।
ड्रोन से निगरानी की गई, जबकि दो कंपनियां पीएसी और क्यूआरटी टीमों को संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया। मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में दमकल दल भी तैनात किया गया है। पुलिस अधीक्षक नगर आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि सील किए गए 44 प्रतिष्ठानों की निगरानी 24 घंटे तक पुलिस करेगी, जिसके बाद आवास विकास परिषद आगे की देखरेख करेगा। उन्होंने बताया कि कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई के मद्देनजर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।
उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद आवास एवं विकास परिषद ने बुधवार को भारी पुलिस बल और सात टीमों के साथ कार्रवाई करते हुए 44 भवनों को सील किया था। इनमें शोरूम, अस्पताल, स्कूल और बैंक्वेट हॉल शामिल हैं, जिन पर आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक उपयोग किए जाने का आरोप है। कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों पर विरोध और नारेबाजी भी हुई। व्यापारियों ने परिषद पर गुमराह करने और पहले अनुमति देकर बाद में कार्रवाई करने का आरोप लगाया।
वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है। गौरतलब है कि गत छह अप्रैल को परिषद की ओर से 44 संपत्तियों की सूची सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई थी। इन आवासीय भूखंडों पर पूरी तरह व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। जिसमें स्कूल, अस्पताल, बैंक और विवाह मंडप शामिल हैं। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वानाथन ने आदेश में अवैध इमारतों में चल रहे स्कूल, अस्पताल को लेकर गहरी चिंता जताई थी। छह अप्रैल को हुई सुनवाई में जल्द इस संपत्ति को सील करने के आदेश दिए थे। जिसके बाद बुधवार की सुबह से परिषद ने सील करने की यह कार्रवाई आरंभ की थी।
