Moradabad: मिडिल ईस्ट संकट के बीच निर्यातकों को बड़ी राहत...अब इन जोखिम में मिलेगा सहारा
मुरादाबाद, अमृत विचार। मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और खाड़ी क्षेत्र के समुद्री मार्गों में अस्थिरता का असर मुरादाबाद के निर्यातकों पर भी पड़ रहा था। बढ़ते भाड़े, बीमा प्रीमियम और भुगतान जोखिम से जूझ रहे हस्तशिल्प कारोबारियों को अब केंद्र सरकार की रिलीफ योजना से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की ओर से लागू की गई योजना से मुरादाबाद के कई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगा। पीतल व अन्य हस्तशिल्प उत्पादों के निर्यात से जुड़े व्यापारियों के लिए यह कदम खास तौर पर राहत भरा माना जा रहा है।
बढ़ती लागत से परेशान थे निर्यातक
खाड़ी क्षेत्र में तनाव के चलते जहाजों के मार्ग बदलने पड़े, जिससे माल ढुलाई का खर्च अचानक बढ़ गया। इसके साथ ही युद्ध जोखिम प्रीमियम और अन्य अतिरिक्त शुल्कों में भी वृद्धि हुई। ट्रांसशिपमेंट केंद्रों पर भीड़ बढ़ने से माल भेजने में देरी और लागत दोनों बढ़ीं, जिससे मुरादाबाद के निर्यातकों की परेशानी बढ़ गई थी।रिलीफ योजना के तहत निर्यातकों को तीन तरह से सहायता दी जा रही है।
- 100 प्रतिशत जोखिम कवर, 95 प्रतिशत बीमा कवर
14 फरवरी से 15 मार्च 2026 के बीच भेजे गए माल पर निर्यात ऋण गारंटी निगम (ईसीजीसी) द्वारा पूरा जोखिम कवर दिया जाएगा। 16 मार्च से 15 जून 2026 तक के निर्यात पर 95 प्रतिशत तक सुरक्षा मिलेगी, जिससे नए निर्यात आदेश सुरक्षित रहेंगे।
- एमएसएमई को सीधी राहत
योजना के तहत लागत, बीमा और भाड़े में बढ़ोतरी का 50 प्रतिशत तक भुगतान, खरीदार द्वारा कीमत घटाने पर अंतर का 50 प्रतिशत तक मुआवजा, प्रति निर्यातक अधिकतम 50 लाख रुपये तक की सहायता और हस्तशिल्प कारोबार को सहारा मिलेगा।
यंग एंटरप्रेन्योर्स सोसाइटी चेयरमैन के जेपी सिंह ने बताया कि मुरादाबाद का हस्तशिल्प उद्योग खाड़ी देशों पर काफी हद तक निर्भर है। ऐसे में यह योजना निर्यात आदेश रद्द होने से बचाएगी और व्यापार की गति बनाए रखने में मदद करेगी। वर्तमान परिस्थितियों में यह योजना निर्यातकों के लिए संजीवनी साबित होगी। बढ़ती लागत और भुगतान की अनिश्चितता के बीच यह सहयोग व्यापार को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा।
