पार्किंसंस के खिलाफ अनोखा वॉकथॉन ! बांसुरी की मधुर धुन से बीमारी को चैलेंज, डॉक्टर बोले- समय पर पहचान जरूरी
लखनऊ, अमृत विचार : पार्किंसंस बीमारी को चुनौती देने कई दिग्गज डॉक्टर रविवार को लोहिया पार्क पहुंचे और समाज को इस जटिल न्यूरोलॉजिकल स्थित के प्रति वॉकथॉन कर जागरूक किया। इस दौरान एक भावनात्मक और प्रेरक क्षण भी आया, जब इस बीमारी को चैलेंज करते हुये मरीज कन्हैया लाल ने बांसुरी बजा कर सुरीली धुन छेड़ी। उनकी इस मनमोहक प्रस्तुति ने जनसमूह को यह संदेश दिया कि यदि उपचार सही है तो सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ पार्किंसंस से लड़ा जा सकता है।
दरअसल, विश्व पार्किंसंस दिवस हर साल 11 अप्रैल को को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस दिन न्यूरोलॉजिकल बीमारी पार्किंसंस के बारे में आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। यही वजह है कि रविवार को 'पार्किंसंस डिजीज एंड मूवमेंट डिसऑर्डर सोसाइटी' (PDMDS) ने जागरूकता वॉकथॉन का आयोजन किया था। जिसमें कई दिग्गज डॉक्टर शामिल हुये। लोहिया पार्क में आयोजित इस वॉकथॉन के बाद डॉक्टरों ने इस बीमारी को लेकर जानकारी भी साझा की।
SGPGI की प्रो. रुचिका टंडन ने बताया कि मौजूदा समय में दवाओं के अलावा 'न्यूरोमॉड्यूलेशन' और 'डीप ब्रेन स्टिमुलेशन' जैसी तकनीकें मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। उन्होंने दैनिक जीवन में विशेष व्यायामों की अनिवार्य बताया है। वहीं डॉ. अमृता मोर ने बीमारी की जानकारी देते हुये लक्षणों के बारे में बताया जिससे बीमारी की सटीक पहचान समय रहते हो सके। उन्होंने बताया कि इस बीमारी में अलग-अलग मरीजों को अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं। उन्होंने मोटर लक्षणों जैसे कंपन, अकड़न और गैर-मोटर लक्षणों नींद और याददाश्त संबंधी समस्याएं के बीच अंतर स्पष्ट किया। इस अवसर पर कानपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप गुप्ता और लखनऊ के डॉ. ए. के. ठक्कर उपस्थित रहे।
क्या होती है पार्किंसंस बीमारी
विशेषज्ञों के मुताबिक अधिकतर यह बीमारी 60 वर्ष से ऊपर उम्र के लोगों को होती है, लेकिन ऐसा नहीं कि इस बीमारी की चपेट कम उम्र के लोग नहीं आ सकते है, कई मामले कम उम्र के लोगों में भी देखे गये हैं। पार्किंसंस तंत्रिका तंत्र की बीमारी है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। इस बीमारी में उंगलियों या हाथों में थरथराहट, कुर्सी से उठने और चलने की प्रक्रिया का धीमा हो जाना,मांसपेशियों में अकड़न जैसी दिक्कते पीड़ित मरीज में दिखाई देती है।
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