Uttrakhand: ये वादा करो न रोओगे तुम, अगर हो भी जाऊं में तुमसे जुदा......
नैनीताल, अमृत विचार। भारतीय सिनेमा और संगीत जगत की दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन की खबर से सरोवर नगरी नैनीताल के संगीत प्रेमियों और रंगकर्मियों में गहरा शोक व्याप्त है। अपने मधुर स्वर से हिंदी सहित अनेक भाषाओं में हजारों गीतों को अमर बनाने वाली आशा ताई के जाने को कला जगत के लिए एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।
यद्यपि आशा भोसले का नैनीताल से प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं रहा, फिर भी इस शहर से उनका भावनात्मक रिश्ता हमेशा बना रहा। नैनीताल की वादियों में फिल्माए गए कई लोकप्रिय गीतों को उन्होंने अपनी आवाज दी, जिनकी गूंज आज भी यहां के वातावरण में महसूस की जाती है। प्रख्यात गायक एवं संगीतकार प्रभात गंगोला, जो लंबे समय तक आशा भोसले के साथ कार्य कर चुके हैं, ने बताया कि उनका पहली बार परिचय वर्ष 1986 में हुआ था, जब वह महान संगीतकार नौशाद अली के सहायक के रूप में कार्यरत थे। इसके बाद उन्होंने कई प्रोडक्शन और फिल्मों में उनके साथ काम किया। गंगोला के अनुसार, आशा ताई बेहद सरल, सहज और असाधारण प्रतिभा की धनी थीं।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद से ही आशा भोसले यहां आने की इच्छा जताती थीं। वर्ष 2002-03 में अल्मोड़ा में आयोजित सांस्कृतिक महोत्सव में उनके आने की तैयारी भी हुई, लेकिन अंतिम समय में स्वास्थ्य कारणों से कार्यक्रम रद्द हो गया। तब उनकी बहन उषा मंगेशकर ने प्रस्तुति दी थी। नैनीताल में फिल्माए गए कई लोकप्रिय गीतों में उनकी आवाज आज भी लोगों के दिलों में बसी है। इनमें ''दिन है बहार के'', ''इन फिजाओं में'' और ''ओ लाली है तू सवेरे वाली'', ''ये वादा करो न रोओगे तुम, अगर हो भी जाऊं में तुमसे जुदा'' जैसे गीत शामिल हैं।
आशा भोसले के निधन पर शहर के कलाकार मिथिलेश पांडे, इदरिश मलिक, जहूर आलम, मदन मेहरा, मुकेश धस्माना और मोहित सनवाल सहित कई लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी।
