अब आपकी एक ही पहचान भारतीय सैनिक, एक ही धर्म राष्ट्रधर्म : राज्यपाल

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Published By Pradeep Kumar
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शिलांग में अग्निवीरों की पासिंग आउट परेड में शामिल हुए राज्यपाल गुरमीत सिंह

नैनीताल, अमृत विचार। उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंहने शुक्रवार को शिलांग स्थित असम रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित असम रेजिमेंट के 7वें बैच के अग्निवीरों की भव्य पासिंग आउट परेड में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने नवप्रशिक्षित अग्निवीरों को राष्ट्रसेवा, अनुशासन, समर्पण और सैन्य मूल्यों का संदेश देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि यह दिन केवल सैन्य प्रशिक्षण पूर्ण होने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अग्निवीरों ने अपने कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से यह साबित कर दिया है कि देश की सीमाएं सुरक्षित हाथों में हैं। उन्होंने अग्निवीरों को संबोधित करते हुए कहा कि अब उनकी कोई क्षेत्रीय या व्यक्तिगत पहचान नहीं है, बल्कि उनकी एकमात्र पहचान “भारतीय सैनिक” है। उनका एक ही धर्म राष्ट्रधर्म और एक ही जाति भारतीय है। राज्यपाल के इस संदेश पर परेड स्थल तालियों से गूंज उठा। उन्होंने अग्निवीरों से साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सैन्य तकनीकों में दक्ष बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वही सेना सबसे प्रभावी होगी, जो तकनीकी क्षमता और मानवीय दक्षता का बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। अग्निवीर भारत के आधुनिक, आत्मविश्वासी और तकनीक-सक्षम न्यू एज वॉरियर्स हैं। राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारतीय सेनाओं का तेजी से आधुनिकीकरण हुआ है और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती मिली है। स्वदेशी सैन्य प्रणालियां भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुकी हैं। उन्होंने अग्निवीरों के माता-पिता और अभिभावकों को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार ही देश की वास्तविक शक्ति हैं, जिन्होंने अपने पुत्रों को राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित किया है।

असम रेजिमेंट मेरी मातृ-रेजिमेंट
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने असम रेजिमेंट से अपने गहरे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं इस गौरवशाली रेजिमेंट के सैनिक रहे हैं और यहां आकर उन्हें घर वापसी जैसा अनुभव हो रहा है। उन्होंने कहा कि असम रेजिमेंट ने उन्हें केवल सैन्य प्रशिक्षण ही नहीं दिया, बल्कि अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा के संस्कार भी दिए, जिन्होंने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। उन्होंने कहा कि असम रेजिमेंट का इतिहास वीरता, बलिदान और राष्ट्रनिष्ठा से भरा हुआ है। जब-जब देश पर संकट आया, इस रेजिमेंट के जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मनों के मंसूबों को विफल किया। राज्यपाल ने कहा कि आज का युद्ध परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और भविष्य के युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं जीते जाएंगे।

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