Uttrakhand News : क्या है सूरज पर 'कोरोना' का रहस्य ? सुलझने के करीब पहुंची ये गुत्थी
अमृत विचार, नैनीताल। सूर्य का बाहरी वायु मंडल कोरोना के अत्यधिक तापमान की गुत्थी अब सुलझने के करीब जा पहुंची है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज की शोध छात्रा अंबिका सक्सेना ने सिमुलेशन के जरिए समझाया है कि सूर्य के प्लाज्मा के तरंगों के विविध घनत्व के कारण सूर्य के कोरोना के तापमान में वृद्धि होती है।
सूर्य की अंतिम परत को कहते हैं कोरोना
सूर्य का वायु मंडल पृथ्वी की ही तरह है। पृथ्वी के वायु मंडल की आखिरी परत अधिक ठंडी होती है, जबकि सूर्य के वायु मंडल की अंतिम परत बेतहाशा गर्म होती है। सूर्य की अंतिम परत को कोरोना कहा जाता है। जिसमें आश्चर्यजनक बात यह है कि सूर्य की सतह के ताप से कोरोना का तापमान लाखों गुना अधिक रहता है। सूर्य की सतह पर 5500 डिग्री सेल्सियस तापमान रहता है, जबकि कोरोना का ताप हजारों केल्विन तक पहुंच जाता है। कोरोना का तापमान क्यों इतना अधिक रहता है। इस बारे में अभी तक सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है। इस रहस्य को समझने के लिए अनेकों शोध किए जा चुके हैं, लेकिन इस रहस्य का आज भी पता नहीं चल सका है।

छात्रा ने किया प्लाजमा पर शोध
इधर एरीज की शोध छात्रा अंबिका सक्सेना ने सूर्य से निकलने वाले प्लाज्मा पर शोध किया है। उनके शोध में बताया है कि प्लाज्मा के तरंगों का घनत्व एक समान न होकर अलग अलग रहता है। सूर्य का कोरोना चुंबकीय संरचनाओं से भरा हुआ है जो तरंगों के प्रवाह के साथ लगातार हिलती रहती हैं। इनमें सबसे सामान्य अनुप्रस्थ चुंबकीय जलगतिकीय (एमएचडी) तरंगें हैं। इन्हें अल्फ़वेनिक या किंक तरंगें भी कहा जाता है। ये तरंगें इन चुंबकीय संरचनाओं के साथ बाहर की ओर बढ़ते हुए कोरोना की संरचनाओं को अगल-बगल दोलन कराती हैं। जिसकी वजह से कोराना के तापमान में अंतर आता है।
एस्ट्रोफिज़िकल जर्नल में प्रकाशित शोध
शोध छात्रा अंबिका सक्सेना ने आईआईटी दिल्ली के भौतिकी विभाग के प्रो वैभव पंत के सूपरविजन में यह शोध किया है। उन्होंने अनुप्रस्थ काट में घनत्व असमानताओं वाले एक खुले क्षेत्र के कोरोनल क्षेत्र का सिमुलेशन किया। जिसमे निचली सीमा पर अनुप्रस्थ तरंगें उत्पन्न की गईं और उन्हें संरचित चुंबकीय क्षेत्र के ऊपर की ओर भेजा गया। तब सूर्य के कोरोना का तापमान में वृद्धि का यह कारण सामने आया । एस्ट्रोफिज़िकल जर्नल में यह शोध प्रकाशित हुआ है।
कोरोना के ताप को पूरी तरह समझने में अभी वक्त लगेगा
अंबिका सक्सेना कहती हैं कि इससे सूर्य के कोरोना के अत्यधिक तापमान के कारण का कुछ हद तक पता चलता है, लेकिन अभी यह नहीं कहा जा सकता कि यही एक कारण है। इसके और भी कई कारण हो सकते हैं। जिनका पता लगाने में अभी लंबा समय लगेगा। वह आगे भी इस पर शोध जारी रखेंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि कई दशकों से इस रहस्य को सुलझाने में जुटे सौर वैज्ञानिक अगले कुछ वर्षों में ही इस गुत्थी को पूरी तरह सुलझा लेंगे।
