वैज्ञानिक फैक्ट : चंद्रमा पर दिन गर्म और रात क्यों होती है बेहद ठंडी

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Edited By Anjali Singh
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पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह चंद्रमा अपनी खूबसूरती के साथ-साथ बेहद कठोर वातावरण के लिए भी जाना जाता है। चंद्रमा पर दिन और रात के तापमान में इतना बड़ा अंतर होता है कि यह वैज्ञानिकों के लिए भी लंबे समय तक शोध का विषय रहा है। जहां चंद्रमा पर दिन के समय औसत तापमान लगभग 224 डिग्री फ़ारेनहाइट (करीब 107 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच जाता है, वहीं रात के समय यह गिरकर लगभग -243 डिग्री फ़ारेनहाइट (करीब -153 डिग्री सेल्सियस) तक पहुंच सकता है। कुछ ध्रुवीय क्षेत्रों और स्थायी छाया वाले गड्ढों में तापमान इससे भी कम, लगभग -248 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया है, जो सौरमंडल के सबसे ठंडे स्थानों में गिने जाते हैं।

इस अत्यधिक तापमान परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण चंद्रमा पर वायुमंडल का लगभग न होना है। पृथ्वी का वातावरण दिन में सूर्य की गर्मी को नियंत्रित करता है और रात में उसे धीरे-धीरे बाहर निकलने देता है, जिससे तापमान संतुलित रहता है, लेकिन चंद्रमा पर ऐसा कोई सुरक्षा कवच नहीं है। परिणामस्वरूप, जहां सूर्य की सीधी किरणें पड़ती हैं, वहां सतह तेजी से गर्म हो जाती है और सूर्यास्त के बाद उतनी ही तेजी से गर्मी अंतरिक्ष में निकल जाती है।

चंद्रमा का एक दिन भी पृथ्वी से काफी अलग है। चंद्रमा अपनी धुरी पर बहुत धीमी गति से घूमता है। वहां एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक लगभग 29.5 पृथ्वी दिवस लगते हैं। इसका मतलब है कि चंद्रमा पर लगभग 14 पृथ्वी दिनों तक लगातार दिन और फिर 14 दिनों तक लगातार रात रहती है। लंबे समय तक सूर्य की किरणें पड़ने से सतह अत्यधिक गर्म हो जाती है, जबकि लंबी रात के दौरान लगातार ऊष्मा निकलने से तापमान बेहद नीचे चला जाता है।

वैज्ञानिकों के लिए यह तापमान अंतर बड़ी चुनौती है। चंद्रमा पर भेजे जाने वाले रोवर, लैंडर और अंतरिक्ष यात्रियों के स्पेससूट ऐसे बनाए जाते हैं, जो भीषण गर्मी और कड़ाके की ठंड दोनों का सामना कर सकें। आधुनिक अंतरिक्ष मिशनों में विशेष ताप-नियंत्रण प्रणाली, इंसुलेशन और ऊर्जा प्रबंधन तकनीकों का उपयोग किया जाता है ताकि उपकरण लंबे समय तक काम करते रहें।

दिलचस्प बात यह है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद कुछ स्थायी छाया वाले क्रेटरों में जल-बर्फ (वॉटर आइस) मिलने के प्रमाण भी मिले हैं। भविष्य में यदि इंसान चंद्रमा पर स्थायी ठिकाने बनाता है, तो यही बर्फ पीने के पानी, ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस प्रकार चंद्रमा का अत्यधिक गर्म और ठंडा वातावरण न केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा का विषय है, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों और मानव बस्तियों की योजनाओं के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।