आंदोलन में अराजकतावाद : जंतर-मंतर पर पुलिस का लाठीचार्ज, प्रदर्शनकारियों पर पत्थरबाजी का आरोप

Amrit Vichar Network
Edited By Virendra Pandey
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नई दिल्ली : जंतर-मंतर पर सीजेपी की तरफ से किये जा रहे विरोध प्रदर्शन के बीच एक बार फिर स्थिति गंभीर हो गई है। वहां का माहौल गरमा गया है। प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प की खबर है। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े हैं, इतना ही नहीं लाठीचार्ज भी किया है।

इस दौरान यहां पत्थरबाजी भी हुई है। जिसमें दिल्ली पुलिस के दो एसीपी, 2 इंस्पेक्टर,कई सुरक्षाकर्मी और एनएसयूआई के कार्यकर्ता घायल हुये हैं। एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान पुलिस के एक अधिकारी ने बताया है कि बवाल के बीच उनपर स्प्रे किया गया। जो उनके गले पर पड़ा, जिससे उन्हें काफी देर तक जलन हुई। 

मीडिया रिपोर्ट की मानें तो धरना स्थल के पास स्थित पार्क होटल के सामने कुछ पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था, जिन्हें बचाने के लिए ACP विवेक भगत पहुंचे थे, इसी बीच किसी ने उनके सिर पर डंडे से वार कर दिया। जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।

देशभर से प्रदर्शनकारी पहुंच रहे जंतर मंतर

बसों और ट्रेनों से रात-रातभर यात्रा कर देशभर से प्रदर्शनकारियों के राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने के साथ जंतर-मंतर पर नारेबाजी तेज हो गई और भीड़ भी बढ़ गई। 'चलो संसद' मार्च के दो दिन बाद भी जंतर मंतर धरना जारी है और इसमें नए लोग शामिल हो रहे हैं। कई लोग रात भर का सफर करके पीठ पर बैग और बैनर लेकर विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंचे हैं।

जैसे-जैसे और लोग इस जमावड़े में शामिल होते जा रहे हैं, स्वयंसेवक ने उन्हें बैठने की जगह की ओर भेज रहे हैं और पीने का पानी एवं खाने के पैकेट बांट रहे हैं। स्कूल वर्दी पहने बच्चे, कॉलेज के विद्यार्थियों, ऑफिस जाने वाले लोग और बुजुर्ग प्रदर्शनकारी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आये। कुछ लोग सड़क पर बैठकर मंच से हो रहे भाषण सुन रहे थे, जबकि कुछ अन्य पुलिस बैरिकेड के पास जमा होकर नारे लगा रहे थे और तख्तियां उठाये हुये थे।

जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, कई प्रदर्शनकारी मंच और नीचे जमा लोगों को बेहतर ढंग से देखने के लिए पास के पेड़ों पर चढ़ गए एवं शाखाओं से झंडे लहराने लगे, जबकि पूरे इलाके में नारे गूंजते रहे। पूरे दिन माहौल जोश से भरा रहा। हर कुछ मिनटों में, भीड़ के अलग-अलग हिस्सों से जवाबदेही और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करने वाले नारे लगते रहे। प्राथमिक उपचार किट और पानी की बोतलें लिए स्वयंसेवक भीड़ के बीच घूम रहे थे, जबकि प्रदर्शनकारियों के नए समूह कंधों पर झंडे और बगल में बैनर दबाए प्रदर्शन वाली जगह पर आ रहे थे। व्यवस्था संभालने में मदद कर रहे स्वयंसेवक गुरप्रीत सिंह ने कहा,''सुबह से ही लोग आ रहे हैं और अब भी आ रहे हैं।''

उन्होंने कहा, ''कई लोगों ने हमें बताया कि सोमवार का मार्च देखने के बाद वे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से रात भर बस का सफर करके आए हैं। हर घंटे नए-नए समूह अपने बैग लेकर आ रहे हैं और विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं।''

इनमें 20 साल की अदिति शर्मा भी थी जो जयपुर से अपने चार दोस्तों के साथ आई। उसने कहा, ''हमने कल रात बस पकड़ी और आज सुबह दिल्ली पहुंचे।'' पंजाब से 70 साल के बलदेव एक छड़ी के सहारे यहां पहुंचे। उन्होंने कहा, ''मेरे परिवार ने मुझे उम्र की वजह से यात्रा न करने के लिए कहा था, लेकिन फिर भी मैं आया। जब मैं यहां पहुंचा, तो मैंने देखा कि बच्चे, छात्र, महिलाएं और बुज़ुर्ग सभी एक साथ बैठे थे।'' 

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