Sonam Wangchuk News: नए दिल्ली पुलिस कमिश्नर का पहला एक्शन, मानसून सत्र से पहले अस्पताल भेजे गए वांगचुक; क्या हैं इसके राजनीतिक मायने ?
वांगचुक को लेकर जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल तक की यह कार्रवाई अब केवल एक मेडिकल निर्णय नहीं, बल्कि मानसून सत्र की राजनीति, विपक्ष की रणनीति और दिल्ली पुलिस की नई कार्यशैली, तीनों के संदर्भ में देखी जा रही है।
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अनुज शर्मा, लखनऊ।
संसद का मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले दिल्ली में हुआ एक घटनाक्रम राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। नए दिल्ली पुलिस आयुक्त (कमिश्नर) अनुराग कुमार के कार्यभार संभालने के महज एक दिन बाद उनकी निगरानी में पहली बड़ी कार्रवाई हुई। शनिवार सुबह जंतर-मंतर पर 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई।
इस कार्रवाई की टाइमिंग ने कई सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है,दूसरी तरफ विपक्ष के कई नेता और देश-विदेश की चर्चित हस्तियां सोनम वांगचुक के समर्थन में खुलकर सामने आ चुकी थीं। संसद सत्र शुरू होने से पहले संसद भवन तक प्रस्तावित मार्च को लेकर भी माहौल बन रहा था। ऐसे में वांगचुक को अस्पताल ले जाने की कार्रवाई को केवल स्वास्थ्य संबंधी फैसला नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
नए पुलिस कमिश्नर का पहला बड़ा ऑपरेशन
1994 बैच के एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर के आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस आयुक्त का कार्यभार संभाला था। कार्यभार ग्रहण करने के अगले ही दिन जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई उनके कार्यकाल की पहली बड़ी पुलिस कार्रवाई मानी जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अनुराग कुमार ने सभी जिला और यूनिट प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राजधानी में किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, "पुलिस आयुक्त ने साफ कहा है कि दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।"
आज सुबह माननीय हाईकोर्ट के निर्देशों और नियमित दैनिक स्वास्थ्य जांच के तहत डॉक्टर सोनम वांगचुक के चिकित्सकीय परीक्षण के लिए पहुंचे थे। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा बाधा उत्पन्न की गई, जिसके कारण वहां कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति भी बनी। सोनम वांगचुक की नाजुक स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए और डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें चिकित्सकीय जांच और आवश्यकता पड़ने पर आगे के उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।इसके बाद डॉक्टरों ने सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की जांच और मूल्यांकन किया। डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक उपवास के कारण वह कमजोर हो गए हैं और उनमें डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) के संकेत मिले हैं। फिलहाल उन्हें निगरानी में रखा गया है। उनके स्वास्थ्य की लगातार विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जांच की जा रही है और आगे के आवश्यक परीक्षण भी किए जा रहे हैं।
डीसीपी नयी दिल्ली का आधिकारिक बयान
हाईकोर्ट के आदेश और डॉक्टरों की सलाह का हवाला
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह के आधार पर सोनम वांगचुक को बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के कारण आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने बताया कि कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे हल्की धक्का-मुक्की और हंगामे की स्थिति बनी। हालांकि पुलिस ने "अधिकतम संयम" बरतते हुए पूरी कार्रवाई सुरक्षित ढंग से पूरी की। साथ ही प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करने की अपील भी की गई।
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21 दिन के अनशन से बिगड़ी सेहत
सोनम वांगचुक 28 जून से सीजेपी (CJP) के नेतृत्व में नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थन में आमरण अनशन पर थे। उनकी निगरानी कर रहे डॉक्टरों के अनुसार, अनशन के दौरान उनका करीब 9.5 किलोग्राम वजन कम हो गया था। रक्तचाप और ब्लड शुगर पर लगातार नजर रखी जा रही थी।
केंद्र ने हाईकोर्ट में कहा था-जान बचाने के लिए जो जरूरी होगा करेंगे
गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक का रोजाना मेडिकल परीक्षण कराया जाए और जरूरत पड़ने पर इलाज सुनिश्चित किया जाए। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत से कहा था कि "सोनम वांगचुक की जान बचाने के लिए जो भी जरूरी होगा, सरकार वह करेगी।"
समर्थकों ने लगाए गंभीर आरोप
पुलिस कार्रवाई के बाद वांगचुक के समर्थकों ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी और उनके परिवार की सहमति के बिना जबरन अस्पताल ले जाया गया। वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत डिपके ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उनके साथ मारपीट की और उन्हें हिरासत में लिया। बाद में उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा भी की। वांगचुक के कई समर्थक उसी स्थान पर धरने पर बैठ गए, जहां वह अनशन कर रहे थे। पुलिस की अपील के बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से नहीं हटे।
तीन बड़े राजनीतिक संदेश
पूरे घटनाक्रम को तीन नजरियों से देखा जा रहा है। पहला, संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार किसी भी ऐसे घटनाक्रम से बचना चाहती थी, जिससे विपक्ष को बड़ा राजनीतिक मुद्दा मिल सके। दूसरा, दिल्ली हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश और केंद्र सरकार की अदालत में दी गई प्रतिबद्धता के बाद प्रशासन के पास चिकित्सकीय हस्तक्षेप का आधार मौजूद था। तीसरा, नए पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार के कार्यभार संभालने के तुरंत बाद हुई यह कार्रवाई उनकी प्राथमिकताओं का संकेत भी मानी जा रही है। करीब दो दशक तक इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) में कश्मीर, वीआईपी सुरक्षा और वामपंथी उग्रवाद जैसे संवेदनशील मामलों को संभाल चुके अनुराग कुमार ने पहले ही दिन कानून-व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।
