Gonda News : हर साल बाढ़ निगल जाती है हजारों परिवारों की खुशियां, स्थायी समाधान की राह अब भी अधूरी
गोंडा के तरबगंज तहसील क्षेत्र में सरयू और घाघरा नदी की बाढ़ हर साल दो दर्जन से अधिक गांवों में तबाही मचाती है। करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न होता है और हजारों परिवारों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता है।
उमरी बेगमगंज/गोंडा, अमृत विचार: सरयू और घाघरा नदी के किनारे बसे तरबगंज तहसील के दर्जनों गांवों के लिए मानसून राहत नहीं, बल्कि तबाही का संदेश लेकर आता है। बारिश शुरू होते ही ऐली, परसौली, गढ़ी, जबरनगर, केवटाही समेत नदी तटवर्ती गांवों के हजारों परिवारों की चिंता बढ़ जाती है।
हर वर्ष आने वाली बाढ़ करीब दो दर्जन से अधिक गांवों की बड़ी आबादी को प्रभावित करती है। लगभग 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र जलमग्न हो जाता है, जबकि 4 से 5 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि की फसलें बर्बाद हो जाती हैं। नदी की उफनती धारा हर साल लोगों की मेहनत, सपनों और आशियानों को अपने साथ बहा ले जाती है।
बाढ़ का पानी घरों में घुसते ही लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ता है। कई परिवार तटबंधों, स्कूलों और ऊंचे स्थानों पर अस्थायी शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं। सबसे अधिक संकट पशुपालकों पर आता है, क्योंकि मवेशियों के लिए चारे और सुरक्षित ठिकाने का गंभीर अभाव पैदा हो जाता है। वहीं नदी की तेज कटान हर वर्ष खेत, मकान और पेड़ों को निगलते हुए सैकड़ों परिवारों को बेघर कर देती है।

कटान हर साल निगल रही खेत और आशियाने
ग्रामीणों का कहना है कि राहत और बचाव की तैयारियां हर साल कागजों तक सीमित रह जाती हैं। समय पर पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिलती और किसानों को फसल नुकसान का समुचित मुआवजा भी नहीं मिल पाता। उनका आरोप है कि बाढ़ और कटान की स्थायी रोकथाम के लिए अब तक प्रभावी योजना लागू नहीं की गई। ग्रामीण अशोक सिंह का कहना है कि यदि तटबंधों को समय रहते मजबूत किया जाए, कटान रोकने के स्थायी उपाय किए जाएं और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की ठोस नीति बनाई जाए तो हर वर्ष होने वाली तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता है।
ऐली परसौली नई बस्ती के राधेश्याम यादव बताते हैं कि कई वर्ष पहले उनका घर नदी में समा गया था। आज भी वे दूसरे की जमीन पर छप्पर डालकर जीवनयापन कर रहे हैं। बलराज यादव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। केवटाही निवासी भदई कहते हैं कि घर कटने के बाद पूर्व प्रधान की जमीन पर रह रहे हैं और बाढ़ के समय अधिकारियों के आश्वासन के अलावा उन्हें कोई स्थायी मदद नहीं मिली।
स्पर निर्माण अधूरा, लोगों की बढ़ी चिंता
इधर, सिंचाई विभाग की ओर से तटबंध की सुरक्षा के लिए स्पर निर्माण का कार्य कराया जा रहा है, लेकिन कई स्थानों पर यह कार्य अभी अधूरा है। ऐसे में ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य पूरे नहीं हुए तो इस वर्ष भी बाढ़ और कटान भारी तबाही मचा सकती है। मानसून के दस्तक देते ही क्षेत्र के लोगों के मन में एक ही सवाल है कि इस बार नदी किसका आशियाना और किसकी खुशियां अपने साथ बहा ले जाएगी।
