आजम और अब्दुल हैं गिरोह का मास्टर माइंड

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Published By Indrabhushan Dubey
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मास्टर माइंड समेत अन्य की तलाश में पुलिस दे रही दबिश

कार्यालय संवाददाता, लखनऊ, अमृत विचार: मड़ियांव इलाके में संचालित हो रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा शनिवार देर रात को पुलिस ने किया। इस गिरोह के नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि गिरोह का मास्टर माइंड आजम और अब्दुल है। इन दोनों ने ही सभी गिरफ्तार नौ आरोपियों को नेटवर्क से जोड़ा। सभी को बैंक खाते खुलवाने का टारगेट दिया। साथ सामने आया कि गिरोह में कई अन्य सदस्य हैं। जिनकी तलाश की जा रही है।

इंस्पेक्टर क्राइम ब्रांच शिवानंद मिश्रा के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों से प्रदेश व देश में किन इलाकों में नेटवर्क व सेटअप बना रखा है। इसकी जानकारी हासिल की जा रही है। गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि मास्टर माइंड के निर्देश पर कई जिलों में बैंक खाते खुलवाए थे। खाताधारकों से बैंकिंग दस्तावेज लेकर पूरे खाते का नियंत्रण गिरोह अपने हाथ में लेता था। पुलिस अब इन दोनों समेत गिरोह के अन्य सदस्यों, डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कड़ियों की तलाश में जुटी है। आरोपियों के खिलाफ मड़ियांव थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई है। कार्रवाई पर डीसीपी उत्तरी ने संयुक्त पुलिस टीम को 10 हजार रुपये के पुरस्कार देने की घोषणा की है।

डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, टैबलेट, बैंक खातों, डिजिटल वॉलेट, क्रिप्टो ट्रांजैक्शन, टेलीग्राम चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच करा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि साइबर ठगी की रकम का अंतिम लाभार्थी कौन है और इस नेटवर्क का विस्तार किन राज्यों तथा देशों तक फैला हुआ है।
गिरोह में पांच छात्र शामिल, मिलता था मोटा कमीशन
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार नौ आरोपियों में पांच छात्र हैं। वहीं, चार अन्य मजदूरी, डिलीवरी ब्वाय और पेंटर हैं। इंस्पेक्टर शिवानंद के मुताबिक सैय्यद अब्दुल्ला विधि का छात्र है। वहीं, शाबिर नीट की तैयारी कर रहा है। जबकि सिकंदर, फरहान व तुफैल स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा मो. शाहरूख फर्नीचर कारीगर, महफूज जोमैटो डिलीवरी ब्वाय, मो. बसर ब्लिंकिट में डिलीवरी और मो. रुबान पेशे से पेंटर है। सभी की उम्र 19 वर्ष से 27 वर्ष के बीच है। पुलिस के मुताबिक खाता खुलवाने व इसमें जमा ठगी की रकम निकालकर ठिकाने लगाने पर मोटा कमीशन दिया जाता था। सभी को अलग-अलग टारगेट दिया जाता था। पूरा करने वालों को इनाम भी मिलता था।

पुलिस की अपील
कमिश्नरेट पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, इंटरनेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड या ओटीपी उपलब्ध न कराएं। लालच में आकर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल किसी दूसरे के लिए न होने दें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

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