Hardoi News : गौ-रक्षा के मुद्दे पर अब कोई समझौता नहीं... स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा बयान, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

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Published By Deepak Mishra
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हरदोई पहुंचे ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य ने गौमाता को 'राष्ट्रमाता' घोषित करने की दोहराई मांग, मंदिरों में बढ़ते वीआईपी कल्चर पर भी जताई नाराजगी

ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को हरदोई में गौ-रक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब संत समाज उसी राजनीतिक दल का समर्थन करेगा, जो देश और प्रदेश में गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए ठोस कानून बनाएगा और उसका प्रभावी पालन सुनिश्चित करेगा।

हरदोई, अमृत विचार। ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को हरदोई में गौ-रक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब संत समाज उसी राजनीतिक दल का समर्थन करेगा, जो देश और प्रदेश में गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए ठोस कानून बनाएगा और उसका प्रभावी पालन सुनिश्चित करेगा।

जिला मुख्यालय स्थित गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि उनकी 81 दिवसीय 'गविष्ठ गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा' का उद्देश्य गौ-वंश की रक्षा के लिए जनजागरण करना है। उन्होंने गौमाता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा देने की मांग दोहराते हुए कहा कि गौ-हत्या सनातन संस्कृति पर एक बड़ा कलंक है, जिसे समाप्त करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद उसी सरकार और राजनीतिक दल को मिलेगा, जो गौ-वंश की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाकर उसे सख्ती से लागू करेगा।

गौशाला निर्माण के लिए प्रतिनिधि घोषित

कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने हरदोई में गौशाला निर्माण और गो-रक्षा अभियान को गति देने के लिए स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की आवश्यकता जताई। इस दौरान उन्होंने अखिलेश पाठक को गौशाला निर्माण एवं आंदोलन का मुख्य प्रतिनिधि (अगुवा) घोषित किया।

सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप

बिलग्राम संवाददाता के अनुसार शंकराचार्य ने कहा कि जिस गाय को "माता" कहकर राजनीतिक समर्थन हासिल किया गया, आज उसी गौमाता की सबसे अधिक दुर्दशा हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि गो-रक्षा के नाम पर किए गए वादे आज तक पूरे नहीं हुए और सरकारी तंत्र अब भी गाय को केवल "मवेशी" मानकर ही कार्रवाई करता है।

मंदिरों में वीआईपी संस्कृति पर जताई नाराजगी

शंकराचार्य ने मंदिरों में बढ़ते वीआईपी कल्चर पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भगवान सभी के हैं, लेकिन अब मंदिरों में दर्शन भी आर्थिक और सामाजिक हैसियत के आधार पर होने लगे हैं, जो उचित नहीं है। उन्होंने कहा, "आज प्रधानमंत्री कार्यालय तीर्थ स्थल बन गया है और मंदिर कॉरिडोर में तब्दील हो गए हैं।" उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है। कार्यक्रम में सुभाष पाल, सुधीर पाल, पम्मू यादव, पंकज पाल, हरिश्चंद्र यादव, राकेश प्रधान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत मौजूद रहे।

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