अंतरिक्ष में PM मोदी के Handwritten letter के साथ जाएंगी तीन महान वैज्ञानिकों की मूर्तियां, विक्रम-1 के साथ इतिहास रचेगा 'मिशन आगमन'
18 जुलाई को श्रीहरिकोटा से होगा स्काईरूट एयरोस्पेस के पहले ऑर्बिटल मिशन का प्रक्षेपण, निजी स्पेस सेक्टर के लिए बनेगा ऐतिहासिक पल
डिजिटल डेस्कः भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए 18 जुलाई का दिन बेहद खास होने जा रहा है। स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) अपने पहले ऑर्बिटल मिशन 'मिशन आगमन' के तहत विक्रम-1 रॉकेट को श्रीहरिकोटा से लॉन्च करेगा। इस मिशन की सबसे खास बात यह है कि रॉकेट के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'वंदे मातरम्' लिखा हस्तलिखित पोस्टकार्ड भी अंतरिक्ष की यात्रा करेगा।
PM मोदी के साथ कई हस्तलिखित संदेश भी जाएंगे अंतरिक्ष
'मिशन आगमन' केवल तकनीकी मिशन नहीं, बल्कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े लोगों को समर्पित एक प्रतीकात्मक अभियान भी है। प्रधानमंत्री के संदेश के अलावा स्काईरूट की टीम, निवेशकों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों और दुनियाभर के शुभचिंतकों द्वारा लिखे गए कई पोस्टकार्ड भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।
इसके साथ ही ISRO के वर्तमान और पूर्व अध्यक्षों तथा भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के हस्तलिखित संदेश भी अंतरिक्ष भेजे जाएंगे, जो भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों की कहानी को दर्शाएंगे।
https://twitter.com/MinOfCultureGoI/status/2078004362711064952?s=20
स्काईरूट ने बताया मिशन का उद्देश्य
स्काईरूट एयरोस्पेस ने इस अनोखी पहल को भारत के अंतरिक्ष अभियान से जुड़े हर व्यक्ति को सम्मान देने वाला प्रयास बताया है। कंपनी के अनुसार 'मिशन आगमन' लाखों लोगों की भावनाओं और योगदान का उत्सव है, जिसे अंतरिक्ष तक पहुंचाया जा रहा है।
रॉकेट में होंगे कई आधुनिक तकनीकी पेलोड
विक्रम-1 रॉकेट केवल संदेश ही नहीं बल्कि कई अत्याधुनिक तकनीकी पेलोड भी लेकर जाएगा। इनमें Grahaa Space, Cosmoserve, DCubed और स्काईरूट का अपना SCOPE पेलोड शामिल है।
इसके अलावा Cosmos Diamonds की कलाकृति 'Cosmic Bloom' और एक विशेष माइक्रो-आर्ट पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा होंगे।
कार्बन कंपोजिट से बना है विक्रम-1
'मिशन आगमन' स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है। इससे पहले नवंबर 2022 में कंपनी ने विक्रम-एस की सफल सब-ऑर्बिटल उड़ान पूरी की थी, जो भारत का पहला निजी रूप से विकसित रॉकेट था जिसने अंतरिक्ष की उप-कक्षा तक पहुंच बनाई।
करीब सात मंजिला इमारत जितनी ऊंचाई वाला विक्रम-1 पूरी तरह कार्बन कंपोजिट से तैयार किया गया है। इसे लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में 350 किलोग्राम तक का पेलोड पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें कंपनी द्वारा विकसित 3डी प्रिंटेड रॉकेट इंजन और उच्च क्षमता वाले ठोस रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल किया गया है।
जानें क्यों है खास
इस मिशन के साथ डॉ. सी.वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की अति सूक्ष्म (माइक्रो) मूर्तियां भी अंतरिक्ष की यात्रा करेंगी।
इन मूर्तियों का आकार महज 800 माइक्रोन (0.8 मिलीमीटर) है, यानी यह चावल के एक दाने से भी छोटी हैं। इतनी सूक्ष्म होने के कारण इन्हें सामान्य आंखों से देख पाना संभव नहीं है।
इनमें शामिल तीनों वैज्ञानिकों का भारत के वैज्ञानिक इतिहास में विशेष योगदान रहा है। डॉ. सी.वी. रमन भारत के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक रहे, डॉ. विक्रम साराभाई को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है, जबकि डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम मिसाइल मैन और देश के पूर्व राष्ट्रपति के रूप में विश्वभर में सम्मानित हैं।
तेलंगाना के माइक्रो आर्टिस्ट ने तैयार की अनोखी कृति
इन सूक्ष्म मूर्तियों का निर्माण तेलंगाना के वारंगल निवासी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके माइक्रो आर्टिस्ट अजय कुमार मत्तेवाड़ा ने किया है। उन्होंने बताया कि इस विशेष परियोजना पर वर्ष 2023 से काम शुरू हुआ था और फरवरी 2023 में इसे पूरा कर लिया गया।
अजय के अनुसार तीनों चेहरों को तराशने में 140 घंटे से अधिक का समय लगा। इन मूर्तियों को तैयार करने में स्टेनलेस स्टील, शुद्ध चांदी, 24 कैरेट सोना, सिरेमिक पाउडर और कार्बन फाइबर जैसी विशेष सामग्रियों का उपयोग किया गया। इसके बाद इन्हें 18 कैरेट सोने से बने एक छोटे रॉकेट मॉडल के भीतर सावधानीपूर्वक स्थापित किया गया।
'मेरी कला अंतरिक्ष के इतिहास का हिस्सा बनेगी'
अजय कुमार मत्तेवाड़ा ने कहा कि उनके लिए यह गर्व और सम्मान का क्षण है कि उनकी बनाई हुई माइक्रो मूर्तियां भारत के पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट के साथ अंतरिक्ष में भेजी जा रही हैं। उन्होंने इसे अपनी 40 वर्षों की कला साधना का सबसे बड़ा सम्मान बताया।
उनके मुताबिक, यह मिशन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की तीन पीढ़ियों के महान वैज्ञानिकों को समर्पित एक अनूठी श्रद्धांजलि भी है।
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