केन-बेतवा परियोजना पर घमासान, विस्थापन के विरोध के बीच उमंग सिंघार ने उठाए सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग
भोपाल/छतरपुर। बुंदेलखंड की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। एक ओर सरकार इसे क्षेत्र के जल संकट को दूर करने वाली ऐतिहासिक परियोजना बता रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित ग्रामीणों के विरोध के बीच अब मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने परियोजना में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की है।
विस्थापन के डर से ग्रामीणों का आंदोलन तेज
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केन-बेतवा परियोजना का उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। हालांकि, परियोजना से प्रभावित छतरपुर और पन्ना जिलों के कई गांवों के लोग विस्थापन की आशंका को लेकर लगातार विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन, घर और आजीविका प्रभावित हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने बेहतर पुनर्वास, उचित मुआवजा और प्रभावित परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा की मांग की है। विरोध के दौरान कुछ ग्रामीणों ने फंदा लगाकर और प्रतीकात्मक चिता जलाकर भी अपना आक्रोश जताया।
उमंग सिंघार ने लगाए अनियमितताओं के आरोप
भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित आदिवासियों और किसानों की शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े कामों में पारदर्शिता की कमी है और विस्थापन व मुआवजा वितरण प्रक्रिया में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि परियोजना से जुड़े सभी मामलों की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए और प्रभावित क्षेत्रों में सोशल ऑडिट कराया जाए, जिसमें ग्रामीणों, उनके प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों को शामिल किया जाए।
मुआवजा वितरण में गड़बड़ी का आरोप
उमंग सिंघार ने दावा किया कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों को मुआवजा दिया गया, जो संबंधित गांवों के निवासी नहीं थे, जबकि वास्तविक पात्र परिवारों को लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगह ग्राम सभाओं की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं हुईं।
कंपनी और इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने परियोजना निर्माण से जुड़ी कंपनी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित कंपनी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए भारतीय जनता पार्टी को 60 करोड़ रुपये का चंदा दिया, जिसके कारण सरकार कंपनी के हितों को प्राथमिकता दे रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस कार्रवाई पर भी लगाए आरोप
सिंघार ने आंदोलन कर रहे किसानों और आदिवासियों के साथ पुलिस कार्रवाई का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों से हिरासत के दौरान धन वसूली और दस्तावेज जब्त किए गए। उन्होंने इन आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की।
सरकार के लिए बढ़ी चुनौती
केन-बेतवा परियोजना को बुंदेलखंड के विकास और जल संकट के समाधान के लिए अहम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार होगा और लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। वहीं, प्रभावित ग्रामीणों और विपक्ष के सवालों के बाद अब परियोजना में पारदर्शिता, पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम और प्रभावित लोगों के साथ संवाद इस विवाद की दिशा तय करेंगे।
