संपादकीय : विकास की नई राहें
उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल के हालिया फैसले राज्य की विकास-नीति की स्पष्ट दिशा तय करते हैं। एक ओर एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार, दूसरी ओर छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना, आउटसोर्सिंग सेवा निगम को प्रारंभिक वित्तीय सहायता और रोडवेज के लिए नई ई-बसों की स्वीकृति— ये सभी निर्णय बताते हैं कि सरकार आधारभूत संरचना, महिला सशक्तीकरण, रोजगार प्रबंधन और हरित परिवहन को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना चाहती है।
सबसे महत्वपूर्ण निर्णय एक्सप्रेसवे नेटवर्क का विस्तार है। विंध्य एक्सप्रेसवे तथा विभिन्न लिंक एक्सप्रेसवे केवल सड़क परियोजनाएं नहीं हैं, बल्कि आर्थिक गलियारे हैं। बेहतर संपर्क से उद्योग, लॉजिस्टिक्स, कृषि विपणन, पर्यटन और निवेश को गति मिलती है। उत्तर प्रदेश पहले ही पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के कारण निवेशकों के नक्शे पर अधिक मजबूती से उभरा है। यदि नए मार्गों के किनारे औद्योगिक क्लस्टर, वेयर हाउस, कृषि प्रसंस्करण इकाइयां और कौशल केंद्र विकसित किए गए, तो यह नेटवर्क क्षेत्रीय असमानता कम करने में भी सहायक होगी, हालांकि केवल सड़कें आर्थिक विकास की गारंटी नहीं होतीं। यदि उद्योग, बिजली, कौशल, स्थानीय उद्यम और शहरी नियोजन साथ न चलें, तो महंगे एक्सप्रेसवे केवल तेज़ यातायात के मार्ग बनकर रह जाते हैं।
ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में परिवहन की कमी लड़कियों की उच्च शिक्षा में बड़ी बाधा रही है। यदि सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित होता है, तो महाविद्यालयों में प्रवेश, नियमित उपस्थिति और रोजगारोन्मुख शिक्षा में भागीदारी बढ़ सकती है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना दूरदर्शी तो है, किंतु इस योजना की सफलता स्कूटी वितरण के बजाए इससे मापी जाएगी कि इससे उच्च शिक्षा में छात्राओं का नामांकन, स्नातक पूर्ण करने की दर और रोजगार में उनकी भागीदारी कितनी बढ़ती है। सामाजिक परिणाम ही इसकी वास्तविक कसौटी होंगे। उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग सेवा निगम को 20 करोड़ रुपये की ब्याजमुक्त सहायता यदि आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, भुगतान और सेवा शर्तों में पारदर्शिता ला सका, तो लाखों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन तथा एक समान प्रक्रिया का लाभ मिल सकता है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि यह केवल एक नया प्रशासनिक ढांचा बनकर न रह जाए, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों और जवाबदेही को भी मजबूत करे।
रोडवेज के बेड़े में 250 ई-बसों का शामिल होना स्वच्छ परिवहन की दिशा में स्वागतयोग्य कदम है। इससे प्रदूषण, ईंधन व्यय और संचालन लागत में दीर्घकालिक कमी आ सकती है, साथ ही यात्रियों को अधिक आरामदेह सार्वजनिक परिवहन भी मिलेगा, हालांकि इसकी सफलता चार्जिंग अवसंरचना, रख-रखाव और परिचालन दक्षता पर निर्भर करेगी, फिर भी इन सभी प्रस्तावों के बीच एक उल्लेखनीय रिक्तता दिखाई देती है— स्वास्थ्य। इतनी व्यापक कैबिनेट बैठक में यदि जिला अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सकों की नियुक्ति, चिकित्सा शिक्षा या सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना से जुड़ा कोई बड़ा निर्णय भी शामिल होता, तो विकास की तस्वीर अधिक संतुलित दिखाई देती। सड़कें और परिवहन आर्थिक प्रगति के वाहक हैं, किंतु स्वस्थ नागरिक ही उस प्रगति को स्थायी बना सकते हैं। सूबे की नई विकास रणनीति महत्वाकांक्षी है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार एक्सप्रेसवे, शिक्षा, रोजगार, परिवहन और स्वास्थ्य—इन पांचों स्तंभों को समान प्राथमिकता देकर विकास कितना टिकाऊ और समावेशी बना सकेगी।
