UP: दुर्दशा पर आंसू बहा रही रामपुर की भूल भुलैया, 1840 में नवाब अहमद अली खां ने कराया था निर्माण

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Published By Monis Khan
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रामपुर, अमृत विचार। रेलवे स्टेशन से करीब 12 किमी दूर स्थित ग्राम सैजनी नानकार में लखनऊ की तर्ज पर भूल भुलैया है। इस भूल भुलैया का जीर्णोद्धार कराकर नैनीताल आने-जाने वाले पर्यटकों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया जा सकता है। पर्यटकों की आवाजाही से पैसे की आवक भी होगी। अष्टकोणीय भूल भुलैया में एक ही तरह के दरो दीवार भ्रम पैदा करते हैं। लोग इन दरवाजों में घूमकर उसी जगह पहुंच जाते हैं।

राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय से उत्तर दिशा में स्थित घनी झाड़ियों के बीच से एक संकरी सड़क भूल भुलैया तक पहुंचाती है। भूल भुलैया पर उत्तकीर्ण नक्काशी बरबस ही अपनी ओर ध्यान खींचती है। अष्टकोणीय इमारत के आठों ओर एक जैसे प्रवेश द्वार हैं। भीतर विशालकाय दरख्त हैं। जिनकी छाया के कारण दिन में भी अंधेरा रहता है। मकबरानुमा बनी भूल भुलैया के बीचों-बीच नवाब परिवार के लोगों की कबरें हैं। अहाते में करीब नवाब दौर का बना हुआ गहरा कुआं है। इस भूल भुलैया का निर्माण 1840 में नवाब अहमद अली खां ने कराया था। इसके बाद वर्ष 1930 में नवाब हामिद अली खां ने इसका जीर्णोद्धार कराया। फिलहाल रामपुर की भूल भुलैया अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है।

नैनीताल और दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर लगे होर्डिंग
रामपुर में विश्व प्रसिद्ध रजा लाइब्रेरी, गांधी समाधि, जामा मस्जिद, भूल भुलैया, नबी-ए-करीम का कदम शरीफ, इमामबाड़ा, नवाब फैजुल्लाह खां का मकबरा, जनाबे आलिया का लाल मकबरा, भमरौआ और रठौंडा स्थित पातालेश्वर मंदिर समेत कई दर्शनीय स्थल हैं। यदि नैनीताल और दिल्ली लखनऊ हाईवे पर होर्डिंग लगाकर पर्यटकों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सकता है। भूल भुलैया, नबी ए करीम का कदम शरीफ का सौंदर्यीकरण कराकर यहां रेस्टोरेंट आदि खोलकर लोगों को बड़ा रोजगार मिल सकता है।

वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. जहीर सिद्दीकी ने बताया कि सैजनी नानकार में वर्ष 1840 के आसपास नवाब अहमद अली खां ने एक अष्टकोणीय मकबरे का निर्माण कराया था। जिसमें एक जैसे 58 द्वार हैं इस इमारत को स्थानीय स्तर पर भूल भुलैया कहा जाता है। 

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