बाराबंकी : शुल्क वसूली के नियम तय, निजी विद्यालयों की मनमानी पर चलेगा चाबुक

Amrit Vichar Network
Published By Deepak Mishra
On

बाराबंकी, अमृत विचार। निजी विद्यालयों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अभिभावक संघ की शिकायतों का संज्ञान लेते स्कूलों को नियमों का हवाला दिया गया है। चेतावनी यह कि इनके उल्लंघन पर जुर्माना व मान्यता वापसी की कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि निजी स्कूलों में फीस, अन्य शुल्क, ड्रेस को लेकर मनमानी स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क) निर्धारण अधिनियम 2018 के विरुद्ध है।

अधिनियम के अनुसार प्रत्येक विद्यालय को शैक्षिक सत्र शुरू होने से पहले अपनी फीस का पूरा विवरण संबंधित प्राधिकारी को देना होगा तथा उसे वेबसाइट और सूचना पट्ट पर भी प्रकाशित करना अनिवार्य होगा। निर्देश में कहा गया है कि विद्यालय केवल वार्षिक शुल्क जमा कराने की बाध्यता नहीं बना सकते। फीस मासिक, त्रैमासिक अथवा अर्द्धवार्षिक किस्तों में भी ली जा सकेगी।

साथ ही, शैक्षणिक सत्र के बीच पूर्व निर्धारित शुल्क से अधिक फीस नहीं वसूली जा सकती। किसी भी प्रकार का कैपिटेशन शुल्क लेना भी प्रतिबंधित रहेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी छात्र को किसी विशेष दुकान से किताबें, जूते, बैग या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा विद्यालय पांच लगातार शैक्षणिक वर्षों से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदल सकते। बदलाव की दशा में मंडलीय शुल्क नियामक समिति की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर एक से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा, साथ ही विद्यालय की मान्यता भी वापस ली जा सकती है।

संबंधित समाचार