'पंजाब का पटियाला शूट, बनारस की मरसराइज', केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में शुरू हुई हथकरघा वस्त्रों की प्रदर्शनी
लखनऊ, अमृत विचार: अवध हथकरघा हस्तशिल्प एवं ग्रामोद्योग समिति की ओर से बुधवार को गोमतीनगर स्थित केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में पारंपरिक भारतीय हथकरघा वस्त्रों की प्रदर्शनी शुरू हो गई। इसका उद्घाटन भाजपा नेता नीरज सिंह ने किया। 11 मई तक चलने वाली इस प्रदर्शन का केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय हस्तशिल्य विकास योजना व राज्य सरकार की ओडीओपी योजनाओं के तहत किया गया है।
प्रदर्शनी में फैशन के अनुरूप और पारंपरिक व कलात्मक कपड़ों का प्रदर्शन किया जा रहा है। एक ही छत के नीचे देश के विभिन्न हिस्सों के हथकरघा और हाथ से बने पारंपरिक कपड़ों मिलेंगे। इनमें बनारस के मरसराइज, सेमी सिल्क जामदानी के कपड़े, मध्यप्रदेश से हल्की वजनी चन्देरी, महेश्वरी प्रिन्ट कपड़े, बिहार के कोसा कोरा व भागलपुरी सिल्क व काटन, राजस्थान के राजपुताना ठाठ बाट वाली पारंपरिक ठप्पा छपाई व कोटा डोरिया व बंधेज के कपड़ों के स्टाल लगे हैं।
इसके अलावा गुजरात के तटीय क्षेत्र कच्छ व भुज पारंपरिक छपाई व बंजारा कढ़ाई एवं बांधनी के कपड़े, पंजाब की पटियाला शलवार व शेरवानी पर फुलकारी व सिन्धी कढ़ाई, जम्मू-कश्मीर के चिनार की पत्ती व घाटी के फूलों से सजी हाथ की कढ़ाई के कपड़े, पश्चिम बंगाल के तांत व कांथा, बालूचरी व भावलू, तनछुई जामदानी की साड़ियां, उड़ीसा के पारंपरिक मंदिर बार्डर वाली सम्भलपुरी इक्कत के कपड़े, आन्ध्र प्रदेश की उप्पाड़ा व प्राकृतिक रंगों से बनी कलमकारी व जरी बार्डर वाली मंगलगिरि व बिराला के कपड़े, कर्नाटक रॉ सिल्क एवं हुबली, बेलगाम की साड़ियां, तमिलनाडु की मदुरई व सेलम व काजीवरम् साड़ियां, असम की सेमी मूगा व सिल्क की साड़ियां तथा अनेक प्रकार की आर्टीफिशियल ज्वेलरी व सजावटी आइटम के स्टाल भी लगाए गए हैं।
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