UP: तीन हफ्ते बाद पिंजरे में कैद हुआ बाघ, बकरी के लालच में आया शिकंजे में
महंगापुर, अमृत विचार। पलिया रेंज के महंगापुर-त्रिकोलिया समेत दर्जनों गांवों में पिछले कई हफ्तों से दहशत का कारण बना बाघ आखिरकार वन विभाग के जाल में फंस गया। रात में बकरी के लालच में वह पिंजरे में कैद हो गया, जिसके बाद ग्रामीणों और वन विभाग की टीम ने राहत की सांस ली।
7 मार्च को पलिया रेंज के ग्राम गदनिया के महिपालपुरवा में एक मजदूर के पालतू बछड़ों पर हमले के बाद से बाघ की लगातार दस्तक बनी हुई थी। इसके बाद त्रिकोलिया, पढूवा, अंजीर बोझ, पकरिया, इब्राहीमपुर, हरिनगर, मंसूरी फार्म सहित कई गांवों में बाघ देखे जाने से लोगों में भय का माहौल था। किसान खेतों में जाने से डर रहे थे और मजबूरी में समूह बनाकर काम कर रहे थे। बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग और रेस्क्यू टीम लगातार प्रयास कर रही थी। पिंजरा, कैमरा, हाथी और टैक्यूलाइजर गन की मदद से कई बार कोशिश की गई, लेकिन बाघ हर बार टीम को चकमा दे रहा था।
मंगलवार रात पलिया रेंजर विनय कुमार के नेतृत्व में डिप्टी रेंजर शिव बाबू सरोज, फॉरेस्टर राकेश कुमार और बफर जोन के पशु चिकित्सक दयाशंकर की टीम को सूचना मिली कि बाघ महंगापुर के विक्रम वन-इब्राहीमपुरी बॉर्डर के पास एक झील के आसपास मौजूद है। इसके बाद टीम ने वहां पिंजरे में बकरी बांधकर जाल बिछाया। कई दिनों से भूखे बाघ ने जैसे ही बकरी को देखा, वह लालच में पिंजरे के अंदर घुस गया और तुरंत कैद हो गया। टीम ने बाघ को सुरक्षित पकड़कर पलिया रेंज कार्यालय लाया, जहां रातभर निगरानी में रखा गया। बुधवार सुबह डीएफओ कीर्ति चौधरी के नेतृत्व में पशु चिकित्सक द्वारा बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। पूरी तरह स्वस्थ पाए जाने के बाद बाघ को सुरक्षित रूप से गोरखपुर चिड़ियाघर भेज दिया गया। बाघ के पकड़े जाने के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है।
