बेजुबान पशुओं को मिली जुबां, नाम गौरी-शंकर
यूपी के सीतापुर में एक महिला ने निराश्रित पशुओं के संरक्षण में ऐसा बीड़ा उठाया कि घर की गृहस्थी को तिलांजलि देकर लाखों का फ्लैट ही खरीद डाला। 16 वर्षों से गोवंशों की सेवा करने में लगा परिवार गौमाताओं के लिए पौष्टिक भोजन के साथ फल-सब्जी और पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता भी करा रहा है।

काष्ठा फाउंडेशन की संचालिका भावना सक्सेना बताती हैं कि 16 वर्ष पूर्व उन्हें नंदी चोटिल मिला, सड़क किनारे दो गौमाताएं भी थीं। अधिक जख्म होने के कारण कोई आगे नहीं बढ़ा, परिवार के साथ मिलकर सभी को घर के करीब ले लाए ताकि सेवा की जा सके।

तमाम प्रयास के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। तभी से मन बना लिया कि निराश्रित पशुओं के लिए छांव के साथ सारे इंतजाम करने हैं। भावना बताती हैं कि परिवार के सहयोग से पैसे इकट्ठा किए, घर की ज्वैलरी भी बेंच दी, बाद में सड़क किनारे एक मकान खरीदा। फ्लैट में गौवंश के साथ 72 निराश्रितों का परिवार है। इनमें नियमित उपचार के साथ फल-सब्जियों का वितरण कराया जाता है।

ठीक होने के बाद लोगों ने अपनाए गौवंश
भावना सक्सेना की पुत्री योशिता निजी कंपनी में कार्यरत हैं। कहती हैं कि ठीक होने के बाद कई गौवंशों को अपनाने के लिए शहर और उसके आसपास के परिवार आगे आए, बताती हैं कि सड़क पर निकलते समय घायल और बीमार पशुओं को लाना दिनचर्या में है। अब तक एक लाख से अधिक गौवंशों की सेवा की जा चुकी है।
भंडारा और अंतिम संस्कार के लिए परिवार एकजुट
भावना बताती हैं कि परिवार में पुत्र स्वरित और बहू निधि के अलावा पति मुकुल मोहन और पुत्री योशिता मिलकर गौवंशों और निराश्रित पशु (कुत्ता, बिल्ली आदि) के लिए भंडारे का आयोजन करते हैं, शहर और उसके आसपास हादसे का शिकार पशुओं के अंतिम संस्कार का जिम्मा भी दैनिक दिनचर्या में है।
नाम पुकारते ही दौड़ पड़ते हैं गौवंश
महिला और उनके बच्चों ने हर गौवंश का नाम रखा गया है। राजा, गणेश, गौरी, शंकर, गौरा, यशोदा, ममता, मंत्र, काली, रघु, भरत, आदि, छोटू, चंदू, बिल्लो सहित अन्य नामों से पुकारे जाने वाले गौवंश नाम सुनते ही दौड़ पड़ते हैं।
-जीशान कदीर, सीतापुर
