विश्व धरोहर दिवस : सभ्यता की अमूल्य धरोहरों को संरक्षण की जरूरत
प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसे विश्व विरासत दिवस, वर्ल्ड हेरिटेज डे तथा आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस (इंटरनेशनल डे फोर मोन्यूमेंट्स एंड साइट्स) कहा जाता है। यह दिवस मानवता की साझा सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इन स्थलों का संरक्षण यूनेस्को विश्व धरोहर सम्मेलन, 1972 के अंतर्गत किया जाता है, जिसे यूनेस्को सदस्य देशों द्वारा स्वीकार किया गया एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समझौता माना जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य विश्वभर के ऐतिहासिक स्मारकों, सांस्कृतिक स्थलों, पुरातात्विक अवशेषों, प्राकृतिक संपदाओं तथा मानव सभ्यता से जुड़ी अमूल्य विरासतों के संरक्षण के प्रति जनचेतना उत्पन्न करना है। वास्तव में धरोहर केवल पत्थरों से बनी इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे हमारी संस्कृति, परंपरा, कला, ज्ञान, संघर्ष, इतिहास और सामूहिक पहचान की जीवंत प्रतीक हैं।
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वर्तमान में 10 चयन मानदंड निर्धारित हैं, जिनमें से कम से कम एक को पूरा करना आवश्यक है। इनमें ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक प्रभाव, प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता तथा वैज्ञानिक महत्व जैसे पहलू सम्मिलित हैं। विश्व धरोहर मुख्यतः तीन प्रकार की होती है- पहली, सांस्कृतिक धरोहर, जिसमें स्मारक, मंदिर, मस्जिद, चर्च, किले, मूर्तियां, प्राचीन नगर, स्थापत्य कला, भाषा, संगीत, नृत्य और परंपराएं शामिल हैं। दूसरी, प्राकृतिक धरोहर, जिसमें पर्वत, नदियां, समुद्र, वन, वन्यजीव, जैव विविधता और अद्वितीय प्राकृतिक परिदृश्य आते हैं तथा तीसरी, मिश्रित धरोहर, जिनमें सांस्कृतिक और प्राकृतिक दोनों विशेषताएं विद्यमान होती हैं। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यूनेस्को केवल स्थायी संरचनाओं या प्राकृतिक स्थलों को ही नहीं, बल्कि अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को भी मान्यता देता है। भारत की योग परंपरा और कुंभ मेला इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
विश्व स्तर पर सबसे अधिक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों वाला देश इटली है, जिसके बाद चीन का स्थान आता है। भारत भी विश्व धरोहर स्थलों की दृष्टि से अग्रणी देशों में सम्मिलित है। यूनेस्को एक विशेष सूची ‘वर्ल्ड हेरिटेज इन डेंजर’ भी संचालित करता है, जिसमें उन स्थलों को शामिल किया जाता है, जो युद्ध, प्रदूषण, प्राकृतिक आपदा, अतिक्रमण, अत्यधिक पर्यटन, जलवायु परिवर्तन या उपेक्षा के कारण संकट में हों। यदि कोई स्थल संरक्षण मानकों का पालन न करे या उसका मूल स्वरूप गंभीर रूप से बदल जाए, तो उसे सूची से हटाया भी जा सकता है।
उदाहरणस्वरूप ओमान का अरेबियन ओरिक्स अभयारण्य तथा जर्मनी की ड्रेसडेन एल्बे घाटी को सूची से हटाया जा चुका है। यहां यह उल्लेखनीय है कि अक्टूबर 2024 तक विश्वभर के 196 देशों में लगभग 1,223 विश्व धरोहर स्थल थे, जिनमें 952 सांस्कृतिक, 231 प्राकृतिक और 40 मिश्रित स्थल शामिल हैं। भारत जैसे प्राचीन और बहुसांस्कृतिक देश में इस दिवस का विशेष महत्व है। अप्रैल 2025 तक भारत में 43 विश्व धरोहर स्थल (34 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 2 मिश्रित) तथा 62 स्थल संभावित सूची में सम्मिलित थे। भारत के प्रमुख धरोहर स्थलों में ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी, अजंता-एलोरा गुफाएं, एलीफेंटा गुफाएं, खजुराहो समूह, सांची स्तूप, महाबोधि मंदिर, हम्पी, महाबलीपुरम, जंतर-मंतर, कुतुब मीनार, लाल किला, कोणार्क सूर्य मंदिर, नालंदा, भीमबेटका, सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, पश्चिमी घाट तथा कंचनजंघा राष्ट्रीय उद्यान प्रमुख हैं।
विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष एक विशेष थीम घोषित की जाती है। वर्ष 2026 की थीम है-‘संघर्षों और आपदाओं के संदर्भ में जीवित विरासत के लिए आपातकालीन प्रतिक्रिया’ रखी गई है। इसका आशय यह है कि युद्ध, संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं के समय केवल भवनों और स्मारकों की ही नहीं, बल्कि जीवित विरासतों-जैसे लोक परंपराएं, सामाजिक ज्ञान, सांस्कृतिक पहचान और समुदाय आधारित परंपराएं की भी त्वरित सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। विश्व धरोहर दिवस केवल कैलेंडर की एक तिथि नहीं, बल्कि मानवता की साझा विरासत को सुरक्षित रखने का वैश्विक संकल्प है। यदि हम अपनी धरोहरों की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास, संस्कृति और पहचान से वंचित हो जाएंगी। अतः विकास के साथ-साथ विरासतों के संरक्षण, संवर्द्धन और सम्मान के लिए हमें दृढ़ संकल्पित होकर कार्य करना चाहिए।-सुनील कुमार महला
